उरई |
आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा जनसहभागिता आधारित बनाने की दिशा में जनपद जालौन ने एक और ठोस कदम बढ़ाया है। आपदा मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत द्वितीय बैच के चयनित 30 आपदा मित्रों को 12 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण हेतु राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) प्रशिक्षण केंद्र, लखनऊ के लिए रवाना किया गया।
कलेक्ट्रेट परिसर से जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने स्वयं आपदा मित्रों के दल को हरी झंडी दिखाकर विदा किया। इस अवसर पर उन्होंने आपदा मित्रों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवक सबसे बड़ी ताकत होते हैं, जिनकी तत्परता से जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सकता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान स्वयंसेवकों को अग्निकांड, बाढ़, आकाशीय बिजली, सर्पदंश, भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने के लिए प्राथमिक चिकित्सा, खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) तथा राहत कार्यों की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के लिए सक्षम बनाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात सभी आपदा मित्रों को आपदा किट एवं बीमा पॉलिसी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे स्वयं सुरक्षित रहते हुए दूसरों की जान बचाने का कार्य कर सकें। जिलाधिकारी ने आपदा मित्रों से अपेक्षा जताई कि वे प्रशिक्षण के बाद अपने-अपने क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन के संवाहक बनकर समाज की सेवा करेंगे।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संजय कुमार, जिला आपदा विशेषज्ञ अचल श्रीवास्तव, आपदा प्रबंधन कार्यालय एवं नागरिक सुरक्षा कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का माहौल उत्साह, जिम्मेदारी और सेवा भाव से परिपूर्ण रहा। आपदा मित्रों ने भी प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने और संकट की घड़ी में जनसेवा के लिए सदैव तत्पर रहने का संकल्प व्यक्त किया।






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