श्रद्धा, संस्कार और रामभक्ति का संगम — गुपलापुर में स्व. रामसिंह सेंगर की पुण्यतिथि पर भव्य मानस सम्मेलन संपन्न

सिरसाकलार–उरई |
कुठौंद ब्लॉक के ग्राम गुपलापुर में समाजसेवा, श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम उस समय देखने को मिला, जब स्वर्गीय रामसिंह सेंगर (पूर्व प्रधान) की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर तीन दिवसीय विशाल श्रीरामचरितमानस सम्मेलन का भावपूर्ण आयोजन किया गया।

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी समाजसेवी रामपाल सिंह सेंगर द्वारा अपने पूज्य पिता की पुण्य स्मृति में यह भव्य धार्मिक आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्रभर से श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्यलाभ अर्जित किया।

सम्मेलन के अंतिम दिवस प्रसिद्ध मानस वक्ता डॉ. ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने अपनी अमृतमयी वाणी से श्रोताओं को राममय कर दिया। उन्होंने कहा कि “श्रीरामचरितमानस मानव जीवन का उद्धार करने वाला दिव्य ग्रंथ है। इसके नियमित पाठ से मनुष्य सत्पथ पर अग्रसर होता है और जीवन को सार्थक बनाता है।”

उन्होंने भरत जी के चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भरत जैसे भाई आज भी समाज के लिए आदर्श हैं, जिन्होंने अयोध्या जैसे वैभवशाली राज्य को त्यागकर केवल प्रभु श्रीराम की खड़ाऊँ को सिंहासन पर विराजमान कर राज्य संचालन किया। वन में पैदल चलकर बड़े भाई से मिलने जाना उनके त्याग, प्रेम और मर्यादा का सर्वोच्च उदाहरण है। वक्ता ने कहा कि आज के समाज को भरत जैसे भाई से प्रेम, सम्मान और कर्तव्य का पाठ सीखना चाहिए।

तीनों दिनों तक विद्वान कथावाचकों द्वारा श्रीरामचरितमानस की रसपूर्ण व्याख्या की गई। मुख्य वक्ताओं में ब्रह्मचारी अरविंद दास जी महाराज एवं रमाकांत शास्त्री ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रोताओं को भक्ति के सागर में डुबोए रखा।

इस आयोजन का सफल संयोजन लल्लू सिंह भदौरिया द्वारा किया गया। कथा के दौरान जगम्मनपुर के सुकृत शाह, महंत सुरेंद्र दास, सुरेंद्र सरसेला, पूर्व ब्लॉक प्रमुख साहब सिंह, बाबू सिंह सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और रामनाम की गूंज से गुंजायमान रहा। यह सम्मेलन न केवल धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि संस्कार, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक एकता का सशक्त संदेश भी देता रहा।

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