उरई (सू०वि०)।
जहाँ लोहे की सलाखें आज़ादी को बाँधती हैं, वहीं न्याय और संवेदना की किरण जब भीतर पहुँचती है, तो उम्मीदें फिर से जाग उठती हैं। इसी भावना के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शाम्भवी प्रथम ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे के साथ शनिवार को जिला कारागार उरई का साप्ताहिक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न बैरकों में जाकर निरुद्ध बंदियों से सीधा संवाद किया, उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुना और उन्हें शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया। यह भ्रमण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए आशा का संदेश था, जो न्याय की प्रतीक्षा में दिन गिन रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से उन बंदियों पर ध्यान दिया, जिनकी जमानत न्यायालय से स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन जमानतदार के अभाव में वे अब भी कारागार में हैं। ऐसे बंदियों की सूची तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश दिए गए, ताकि प्रभावी पैरवी के माध्यम से उन्हें शीघ्र रिहाई मिल सके। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों की जमानत राज्य की ओर से जिला अधिकार प्राप्त समिति के माध्यम से कराए जाने के निर्देश भी दिए गए।
सचिव महोदया ने कारागार चिकित्सालय का निरीक्षण कर बंदियों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। महिला बंदियों एवं उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा, पोषण और देखभाल की व्यवस्थाओं का भी गहन परीक्षण किया गया।
बाल कारागार में निरुद्ध किशोरों से अलग-अलग बातचीत कर उनकी स्थिति जानी गई तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि किसी भी बंदी को विधिक सहायता से वंचित न रखा जाए। जिनके पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं, उनके लिए सरकारी खर्च पर अधिवक्ता उपलब्ध कराने एवं न्यायमित्र (एमाइकस क्यूरी) की सुविधा दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
दोषसिद्ध बंदियों की अपील समय पर दाखिल कराने, जेल अपील की प्रक्रिया को सरल बनाने और किसी भी विधिक बाधा की स्थिति में उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति से समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए।
इस दौरान जिला कारागार स्थित लीगल एड क्लीनिक का निरीक्षण किया गया, जहाँ सभी अभिलेख संतोषजनक पाए गए।
साथ ही जेल प्रशासन को निर्देशित किया गया कि बंदियों से मिलने आने वाले परिजनों को आगामी 22 फरवरी को आयोजित होने वाले मेगा विधिक सेवा शिविर की जानकारी दी जाए, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार इस शिविर का लाभ उठा सकें।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक नीरज देव, कारापाल प्रदीप कुमार, चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल बर्मन, उपकारापाल अमर सिंह एवं रामलखन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
यह निरीक्षण यह संदेश देता है कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं, बल्कि कारागार की दीवारों के भीतर भी मानवता, संवेदना और अधिकारों की रक्षा के लिए सतत प्रयास जारी हैं।








Leave a comment