उरई।
ग्राम बरसार में आयोजित विष्णु महायज्ञ के समापन समारोह में विकास, संस्कार और सकारात्मक सोच का संदेश गूंज उठा। मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी कुमदेंन्द्र कलाकर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि व्यक्ति का वास्तविक व्यक्तित्व उसके आचरण, संवेदनशीलता और विचारों से परिलक्षित होता है।
उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व मन की अंतरनिहित भावना का प्रतिबिंब होता है। यदि व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास करना चाहता है, तो उसे सकारात्मक सोच को अपनाना होगा, क्योंकि “दृष्टि बदलेगी तभी सृष्टि बदलेगी।” आत्मविश्वास जागृत कर हर असफलता से सीख लेने वाला व्यक्ति ही जीवन में सफलता प्राप्त करता है।
परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी ने कहा कि जो व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मकता और नैतिकता के गुणों को बढ़ाता है, वही सदा प्रगति करता है और प्रसन्न रहता है।
वरिष्ठ पत्रकार श्रीकान्त शर्मा ने समाज में बढ़ती ईर्ष्या और जलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस समाज में लोग एक-दूसरे की सफलता से प्रेरणा लेने के बजाय उसे गिराने का प्रयास करते हैं, वहां सद्भाव और विकास बाधित हो जाता है। उन्होंने कहा कि समाज का वास्तविक उत्थान तभी संभव है, जब लोग ईर्ष्या को सहयोग में और जलन को प्रेरणा में बदलें।
जिला विकास अधिकारी डॉ. निशान्त पांडेय ने “कर्म को पूजा” बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे प्रत्येक कार्य के लिए हम ईश्वर के प्रति भी उत्तरदायी हैं। केवल किसी व्यक्ति को प्रसन्न करने के लिए नहीं, बल्कि कर्तव्यभाव से किया गया कार्य ही परमात्मा को प्रसन्न करता है।
उन्होंने कहा कि विवेकपूर्ण, निःस्वार्थ और समर्पित भाव से किया गया हर कर्म ही सच्ची पूजा है।
इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी डकोर रमेश चंद्र शर्मा, महायज्ञ अध्यक्ष ग्राम प्रधान धर्मपाल कौशिक, ग्राम पंचायत अधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह, यज्ञ संरक्षक रामकुमार शर्मा (लल्लू महाराज), धर्मपाल सिंह राजपूत मुखिया, कोषाध्यक्ष रामबिहारी राजपूत सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
समापन समारोह में आध्यात्मिक वातावरण के साथ सामाजिक समरसता, नैतिकता और आत्मविकास का संदेश देकर महायज्ञ का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।







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