शब्दों की साधना और भावनाओं की बारिश: उरई में गूंजा साहित्य का सुर”

उरई।
क़लमकार संस्था के तत्वावधान में सिटी सेंटर परिसर में जनपद जालौन के सुप्रसिद्ध उस्ताद शायर नासिर अली ‘नदीम’ की काव्य कृति ‘मन भी मिले’ का भव्य एवं गरिमामय विमोचन समारोह संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां वीणा वादिनी सरस्वती के पूजन से हुआ।

इसके पश्चात बाहर से पधारे प्रसिद्ध शायर अख़्तर फ़राज़, यज्ञदत्त त्रिपाठी, पत्रकार केपी सिंह, प्रेम नारायण दीक्षित, डॉ. रेनू चंद्रा, सुरेंद्र खरे, महेंद्र पाटकर एवं डॉ. माया सिंह माया द्वारा पुस्तक का विमोचन किया गया। साथ ही पुस्तक पर सारगर्भित परिचर्चा भी हुई, जो कार्यक्रम का प्रथम चरण रहा।

द्वितीय चरण में कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का शुभारंभ संस्था अध्यक्ष प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम् की सरस्वती वंदना एवं नईम ज़िया कानपुरी की नाते पाक से हुआ। इसके बाद देश-प्रदेश से आए कवियों एवं शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

चित्रकूट से आए प्रसिद्ध शायर अख़्तर फ़राज़ ने पढ़ा—
“उसने कहा है जब से कि मेरा नहीं रहा…”
तो वहीं नासिर अली नदीम ने अपने शेर—
“हाथ मिलते हैं गले मिलते हैं, मन मिलते नहीं…”
से खूब वाहवाही लूटी।

यूसुफ़ अनजान, महेंद्र मिहोनवी, डॉ. रेनू चंद्रा, यज्ञदत्त त्रिपाठी, महेंद्र पाटकर मृदुल, पुष्पेंद्र पुष्प, फरीद अली बशर, नईम ज़िया कानपुरी, मुकरी, इंतख़ाब दानिश, परवेज़ अख़्तर मुन्ना, प्रेम नारायण दीक्षित, शिखा गर्ग, दिव्यांशु दिव्य, प्रगति मिश्रा, शत्रुघ्न सिंह सेंगर, ब्रह्म प्रकाश अवस्थी, राम शंकर गौर, महेश प्रजापति, नवोदित कवि सौरभ सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

संस्था अध्यक्ष प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम् एवं डॉ. माया सिंह माया की रचनाओं ने कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की। वरिष्ठ कवयित्री डॉ. माया सिंह ‘माया’ के कुशल संचालन में कार्यक्रम निरंतर ऊर्जावान बना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार यज्ञदत्त त्रिपाठी ने की तथा विशेष अतिथि के रूप में पत्रकार केपी सिंह उपस्थित रहे। बाहर से आए अतिथि कवि-शायरों में हबीब खान कर्वी, संदीप श्रीवास्तव कर्वी सहित अनेक साहित्यकार शामिल रहे।

कार्यक्रम के समापन पर सभी कवियों एवं शायरों को क़लमकार संस्था द्वारा सम्मानित किया गया। साहित्य, संवेदना और सौहार्द से परिपूर्ण यह आयोजन उरई के साहित्यिक इतिहास में एक यादगार अध्याय बन गया।

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