उरई/बंगरा।
बंगरा क्षेत्र के एक निजी मिडिल स्कूल में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, विद्यालय में अभिभावकों को गुमराह कर इंटरमीडिएट तक के दाखिले कराए जा रहे हैं, जबकि स्कूल की मान्यता केवल कक्षा 8 तक ही सीमित है।

शासन द्वारा पहले ही “अटेचमेंट व्यवस्था” को अवैध घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद, शिक्षा सत्र की शुरुआत में चलाए गए जांच अभियानों का कोई प्रभाव इस विद्यालय पर दिखाई नहीं दिया। नतीजा यह रहा कि नियमों की खुलेआम अनदेखी होती रही।

सूत्रों के अनुसार, विद्यालय प्रबंधन ने अपने छात्रों को परीक्षा दिलाने के लिए कुठोंदा और गणेश नगर स्थित इंटर कॉलेजों से संबद्ध करा रखा है। इससे न तो छात्रों की नियमित पढ़ाई हो पा रही है और न ही प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) प्रशिक्षण।

इसके बावजूद, अभिभावकों से मोटी कोचिंग फीस, ट्यूशन फीस और प्रायोगिक परीक्षा के नाम पर भारी रकम वसूली जा रही है। अब परीक्षा नजदीक आने पर प्रवेश पत्र देने के बदले ब्लैकमेलिंग कर दोबारा वसूली की जा रही है।

इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या विभाग ऐसे शातिर “विद्या-व्यवसायियों” के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर बच्चों का भविष्य यूं ही दांव पर लगता रहेगा?

जनहित में अब जरूरत है कि शिक्षा विभाग तत्काल जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे, ताकि शिक्षा को व्यापार नहीं, संस्कार बनाया जा सके।

Leave a comment