पाक महीने की शुरुआत, इबादत में डूबा उरई

उरई। गुरुवार से पाक महीना रमजान शुरू हो गया है। बुधवार को चांद दिखाई देने के साथ ही शहर भर में धार्मिक उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण बन गया। बाजारों और मस्जिदों में रौनक बढ़ गई, वहीं लोग रमजान की तैयारियों में जुटे नजर आए।

इशा की नमाज के बाद मस्जिदों में नमाज-ए-तरावीह का सिलसिला शुरू हो गया, जिससे देर रात तक इबादत का माहौल बना रहा।


🌙 नबी की मस्जिद से हुआ ऐलान

शहर की प्रमुख नबी की मस्जिद में मगरिब की नमाज के बाद शहर इमाम हाफिज मंजूर बरकाती ने चांद दिखने की तस्दीक की।

इसके बाद माइक से रमजान शुरू होने का आधिकारिक ऐलान किया गया। यह खबर पूरे शहर में तेजी से फैल गई और लोगों ने एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी।


🛍️ देर रात तक रही चहल-पहल

चांद दिखते ही लोग सहरी और इफ्तार की खरीदारी में जुट गए। बाजारों में फल, खजूर, सेवइयां, दूध और अन्य जरूरी सामान की दुकानों पर भीड़ देखने को मिली। देर रात तक बाजार गुलजार रहे।


🤲 अमन और तरक्की की दुआ की अपील

शाही इमाम फिरोज अली रहमानी ने लोगों से अपील की कि—

“रमजान में पाबंदी से नमाज पढ़ें, रोजा रखें और अमन-चैन व तरक्की के लिए दुआ करें। इस महीने में इबादत का सवाब 70 गुना बढ़ जाता है।”

उन्होंने समाज में भाईचारे और आपसी सौहार्द बनाए रखने पर भी जोर दिया।


👨‍👩‍👧‍👦 बच्चों और महिलाओं की भी रही भागीदारी

मस्जिदों में तरावीह के दौरान बच्चों की अच्छी-खासी मौजूदगी रही। वहीं कई महिलाओं ने घरों में ही तरावीह की नमाज अदा की। पूरे शहर में धार्मिक अनुशासन और आस्था का माहौल देखने को मिला।


📌 आस्था और संयम का महीना

रमजान का यह पाक महीना एक माह तक चलेगा, जिसमें रोजेदार संयम, इबादत और सेवा के माध्यम से आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाएंगे। शहर में इस मौके पर शांति, भाईचारे और धार्मिक सौहार्द का सुंदर उदाहरण देखने को मिल रहा है।

क्या है रोजा

धर्मगुरु हाफिज अब्दुल जब्बार की मानें तो लगभग 12-14 घंटों में इंसान को शारीरिक बुराई से दूर रहने का नाम रोजा है। अगर रोजा रखकर भी कोई आदमी सामाजिक और दुनियावी बुराइयों में शामिल रहता है तो उस इंसान को रोजा रखने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

पहला असरा रहमत का

दारुल उलूम बरकाते मुहम्मदिया के प्रिंसिपल मौलाना शमशुल कमर ने बताया कि रमजान का पहला असरा रहमतों का होता है। इस दाैरान सारा वक्त इबादत में लगाएं। रमजान का दूसरा असरा मगफिरत और तीसरा असरा जहन्नुम से छुटकारे का होता है। रमजान को तीन असरों में बांटा गया है।

फल, खजूर की मंडी में बहार, महंगाई की भी मार

रमजान में खजूर से रोजा इफ्तार करने की परंपरा है। लिहाजा शहर की मंडी में खजूर की आवक काफी बढ़ गई है। यहां ईरान, महाराष्ट्र और गुजरात से खजूरों की खेप पहुंच रही है। 100 रुपये किलो से लेकर 1000 रुपये प्रति किलो तक में खजूर बिक रहा है। वहीं, फलों की बात करें तो इसके रेट में 20 से 25 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। तरबूज, सेब, संतरा और अंगूर प्रचुर मात्रा में पहुंचा है। इनकी बिक्री अभी कम हो रही है।

जारी किए हेल्पलाइन नंबर

यदि रोजेदारों के समक्ष रमजान को लेकर शंका और सवाल है तो इसके लिए बघोरा वाली मस्जिद के इमाम हाफिज अजीज कादरी ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। इसमें उन्होंने स्वयं 9936505001 और कारी मुहम्मद रियाज साहब के मोबाइल नंबर 9984462690 जारी करते हुए व्हाट्सएप पर मैसेज कर अपनी शंकाओं को दूर किए जाने की बात कही है।

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