जहां टूटी सीमाएं, वहां खिला सितारा: सिद्धार्थ की ऐतिहासिक सफलता

उरई। समाज में फैले तमाम मिथकों को ध्वस्त करते हुए एक दलित छात्र ने बौद्धिक धरातल पर इतिहास रच दिया है। जिले के होनहार छात्र सिद्धार्थ राज ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक आईआईटी प्रवेश परीक्षा में 99.40 अंकों के शानदार स्कोर के साथ सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है।

यह इस वर्ष जनपद के किसी भी छात्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है। सिद्धार्थ की इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया कि योग्यता और प्रतिभा किसी जाति या खानदान की मोहताज नहीं होती।


🌱 संघर्ष से सफलता तक की कहानी

सिद्धार्थ प्रसिद्ध बसपा नेता एवं सामाजिक समानता की लड़ाई के जांबाज योद्धा आत्माराम फौजी के पौत्र हैं। उनके पिता अशोक कुमार कानपुर में पूर्ति निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं।

साधारण परिवेश में पले-बढ़े सिद्धार्थ ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने अपने प्रदर्शन से वर्ण व्यवस्था से जुड़ी खोखली मान्यताओं को दरकिनार कर एक मजबूत मील का पत्थर स्थापित किया है।


🌟 बुद्धिजीवियों ने जताया गर्व

सिद्धार्थ की ऐतिहासिक सफलता पर जनपद के प्रबुद्धजनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हर्ष और गर्व व्यक्त किया है।

पूर्व विधायक सब्त्राम कुशवाहा,
इप्टा अध्यक्ष देवेन्द्र शुक्ला,
सचिव राज पप्पन,
चौधरी जय करन सिंह,
गिरेन्द्र सिंह,
अशोक गुप्ता
एवं नोटरी मजिस्ट्रेट सुशील पाण्डेय सहित अन्य लोगों ने सिद्धार्थ को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि—

“सिद्धार्थ की यह सफलता दबे-कुचले समाज के हजारों होनहारों के मनोबल को नई ताकत देगी।”


📌 प्रेरणा बना सिद्धार्थ

सिद्धार्थ राज की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक मजबूत मिसाल है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अवसर और मेहनत मिले तो हर गुदड़ी का लाल चमक सकता है।

आज सिद्धार्थ जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं और उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने का साहस देगी।


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