उरई।
तहसील क्षेत्र के ग्राम मिनौरा, कालपी स्थित गाटा संख्या 402 की भूमि की बिक्री को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि भूमि के विक्रय में अनियमितता बरती गई और पहले से किए गए रजिस्टर्ड इकरारनामा को नजरअंदाज करते हुए अन्य व्यक्तियों के नाम बैनामा कर दिया गया।
बताया गया कि इस भूमि में जगत विक्रम सिंह कुल रकबे के आधे हिस्से के मालिक और काबिज थे, जबकि शेष भूमि के संबंध में उनके नाम रजिस्टर्ड इकरारनामा किया गया था। भूमि स्वामी मूलचंद ने उन्हें एक वर्ष के भीतर बैनामा कराने का समय दिया था, लेकिन कोरोना काल के दौरान आर्थिक समस्या के कारण वे निर्धारित समय में धनराशि का प्रबंध नहीं कर सके।
बाद में जब जगत विक्रम ने धनराशि की व्यवस्था कर भूमि स्वामी को नोटिस देकर बैनामा कराने के लिए कहा, तो आरोप है कि मूलचंद ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और उक्त भूमि का विक्रय अन्य लोगों के नाम कर दिया। आरोप के अनुसार यह भूमि लघु सिंचाई विभाग में कार्यरत अवर अभियंता संतोष गुप्ता, प्रमोद गुप्ता आदि के नाम पंजीकृत करा दी गई।
बताया जाता है कि बाद में इन लोगों ने कुछ ही महीनों के भीतर यह भूमि झांसी की नटराज कंपनी के मालिक खन्ना के नाम बैनामा कर दी, जिससे काफी लाभ कमाया गया। आरोप है कि पहले से किए गए इकरारनामा के तथ्य छिपाकर भूमि का विक्रय कर दिया गया।
इस मामले में जगत विक्रम सिंह ने वर्ष 2022 में सिविल कोर्ट में वाद दायर किया था। सीनियर डिवीजन न्यायालय ने धनराशि वापसी का आदेश दिया, जिससे असंतुष्ट होकर उन्होंने उच्च न्यायालय में अपील की।
उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में नोटिस जारी करते हुए एक माह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
बताया गया कि जगत विक्रम सिंह ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार से भी मुलाकात कर उन्हें सभी दस्तावेज सौंपे। पुलिस अधीक्षक ने दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद शहर कोतवाल को निर्देश दिए कि सभी पक्षों को बुलाकर न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
इसके साथ ही विवादित गाटा संख्या 402 पर किसी भी प्रकार का निर्माण या अन्य कार्य न्यायालय के अगले आदेश तक पूरी तरह रोकने के निर्देश दिए गए हैं।





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