पुराने शिक्षकों पर टेट लागू करने का विरोध, राहत की उठी मांग

उरई।
अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर जनपद में टेट अनिवार्यता से मुक्ति को लेकर अभियान ने गति पकड़ ली है। महासंघ के घटक एससी-एसटी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संयोजन में यह अभियान 22 मार्च तक संचालित किया जाएगा।

अभियान के तहत प्राथमिक-पूर्व माध्यमिक तगारेपुर, प्राथमिक विद्यालय बारा, एनपीआरसी आटा, एनपीआरसी नियामतपुर एवं एमपीआरसी आटा-इटोरा में संकुल बैठकों का आयोजन किया गया। बैठकों के उपरांत शिक्षकों को पोस्टकार्ड वितरित कर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के नाम ‘शिक्षक पाती’ लिखवाई गई।

इस अवसर पर महासंघ के प्रदेश संयोजक सुंदर सिंह शास्त्री ने कहा कि आरटीई एक्ट एवं टेट परीक्षा लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की बाध्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब नियुक्ति उस समय की प्रचलित नियमावली के अनुसार हुई थी, तब टेट की शर्त लागू नहीं थी, ऐसे में बाद में लागू की गई शर्तों को बाध्यकारी बनाना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से न्यायालय से प्रभावित शिक्षकों को राहत देने की मांग की।

महासंघ के जिला संयोजक भगवती शरण रजक, आर.पी. गौतम, जिला सहसंयोजक मानवेंद्र सिंह, ब्लॉक संयोजक भानु प्रताप सिंह एवं ओवैस खान ने कहा कि लगभग 55 वर्ष की आयु में शिक्षकों को युवाओं के साथ टेट परीक्षा देना न्यायसंगत नहीं है। इस उम्र में स्मरण शक्ति एवं अध्ययन क्षमता में कमी आती है, जबकि पारिवारिक व विभागीय दायित्वों के कारण अध्ययन के लिए पर्याप्त समय भी नहीं मिल पाता।

कार्यक्रम में सुनील कुमार, अभिषेक वर्मा, प्रेम कुमार, आनंद, आसाराम वर्मा, प्रभात आनंद, अंजली गौतम, यशवंतराव, नितिन, केशवानंद, रवि कुमार, सुरेंद्र प्रकाश, संदीप कुमार, रविकांत, शैलेंद्र कुमार, राम सिंह, शिवकांत, निराला, महेश कुमार, चंद्रशेखर, विवेकानंद, विमल प्रकाश, दिनेश यादव, कौशल किशोर, केदार वर्मा, रवि सिंह, अनूप निगम, शिवम वर्मा, राघवेंद्र द्विवेदी, अशोक कुमार, हरि शंकर झा, शिवपाल, शैलेंद्र निरंजन सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।

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