भक्ति, विश्वास और सत्संग का महत्व बताया

अयोध्या।
श्री जानकी रमण कुंज में वरिष्ठ पत्रकार रामनरेश द्विवेदी द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास पंडित राम मोहन शास्त्री ने आध्यात्मिक प्रवचन करते हुए जीवन के गहन पहलुओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि ब्रह्म का प्रारब्ध से कोई संबंध नहीं होता, लेकिन ब्रह्मज्ञानी का प्रारब्ध से संबंध होता है। शरीर को एक मकान के समान बताते हुए उन्होंने कहा कि जैसे मकान स्वयं नहीं बोलता, उसी प्रकार शरीर भी केवल एक माध्यम है—उसमें स्थित चेतना को पहचानना ही वास्तविक ज्ञान है।

कथा व्यास ने कहा कि आज का मनुष्य बाहरी रूप-रंग और वस्त्रों को सुंदर बनाने में लगा है, जबकि उसे अपने चरित्र को सुंदर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मनुष्य की आकृति नहीं, बल्कि उसकी कृति सुंदर होनी चाहिए।

दांपत्य जीवन पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पति-पत्नी का संबंध विश्वास पर आधारित होता है। यदि इस रिश्ते में अविश्वास आ जाए तो घर में चाहे कितनी भी धन-संपत्ति क्यों न हो, शांति और सुख समाप्त हो जाता है।

उन्होंने जीव के गर्भावस्था का उल्लेख करते हुए बताया कि मनुष्य मां के गर्भ में नौ माह तक कष्ट सहता है और भगवान से बाहर निकालने की प्रार्थना करता है। उस समय वह भजन, सत्संग और सेवा का संकल्प करता है, लेकिन जन्म के बाद वह इन बातों को भूल जाता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे भक्ति, सत्संग और सेवा को अपनाकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं।

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