नाथ पंथ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बुंदेलखंड पर शोध बना आकर्षण का केंद्र

लखनऊ।

अम्बेडकर विश्वविद्यालय के संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन विभाग द्वारा “भारतीय ज्ञान परम्परा में नाथ पंथ का योगदान” विषय पर आयोजित द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन 27 मार्च को सत्र पर्यावरण विज्ञान पीठ के सभागार में उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने किया।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजकुमार मित्तल ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया। पीतांबरा शक्ति पीठ के बटुकों द्वारा वैदिक मंगलाचरण और पीयूष द्वारा लौकिक मंगलाचरण की प्रस्तुति ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर रिपुसूदन सिंह ने मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया। मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास बरखेड़ी ने नाथ पंथ की योग-साधना, तत्त्वचिंतन और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में उसके महत्व पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

विशिष्ट अतिथि के रूप में विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, नव नालंदा महाविहार के डीन विजय कुमार कर्ण तथा बुंदेलखंड के वरिष्ठ पत्रकार के. पी. सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए।

इस दौरान के. पी. सिंह का बुंदेलखंड में नाथ परंपरा के विस्तार पर शोधपरक वक्तव्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के शूरवीर आल्हा पर गुरु गोरखनाथ के प्रभाव की कथा उज्जैन के महाराजा भर्तृहरि के वैराग्य के समकक्ष मानी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकगाथाएं भले पूर्ण इतिहास न हों, लेकिन उनका आधार ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़ा होता है।

उन्होंने नाथ योग साधना, कुंडलिनी जागरण और दीर्घायु की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला तथा आल्हा-ऊदल की परंपरा, सैयद ताल्हा के उल्लेख और बुंदेलखंड में लोकदेवताओं की पूजा के माध्यम से नाथ संप्रदाय के प्रभाव को रेखांकित किया। साथ ही जालौन की मच्छड़ रियासत और पचनद क्षेत्र की परंपराओं का उल्लेख करते हुए नाथ परंपरा के ऐतिहासिक प्रसार पर शोध की आवश्यकता बताई।

वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्स्मरण और पुनर्पाठ की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आनंद कुमार त्रिपाठी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रमेश चंद्र नैलवाल ने प्रस्तुत किया। आयोजन सचिव डॉ. बिपिन कुमार झा के संयोजन में राष्ट्रगान के साथ उद्घाटन सत्र का समापन हुआ।

इस प्रकार संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र गरिमामय, ज्ञानवर्धक एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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