उरई।
उरई नगर में एक राजनीतिक घटनाक्रम के तहत बाल्मीकि समाज से जुड़े एक कार्यकर्ता ने नाराज होकर भाजपा से इस्तीफा दे दिया था और सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। बताया जा रहा है कि वह बीते चार वर्षों से सक्रिय रूप से उरई नगर प्रथम टीम में कार्य कर रहा था, लेकिन संगठन में उचित स्थान न मिलने से वह असंतुष्ट था।
इस बीच सुमित प्रताप सिंह ने पहल करते हुए देर रात लगभग 12 बजे संबंधित कार्यकर्ता से फोन पर बातचीत की और उसकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। बातचीत के दौरान उन्होंने कार्यकर्ता को समझाया और संगठन के प्रति उसकी भूमिका के महत्व को रेखांकित किया। इसके बाद कार्यकर्ता ने न केवल अपना इस्तीफा वापस लिया, बल्कि भाजपा के खिलाफ की गई पोस्ट भी हटा दी और समर्थन में नई पोस्ट साझा की।
स्थानीय स्तर पर इस पहल को संगठनात्मक संवाद का सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है। चर्चा है कि यदि इसी प्रकार जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुनें और समय रहते समाधान करें, तो संगठन और अधिक मजबूत हो सकता है।
गौरतलब है कि सुमित प्रताप सिंह पूर्व में भी एक अन्य कार्यकर्ता को पार्टी छोड़ने से रोककर उसे वापस संगठन से जोड़ चुके हैं।
इस घटनाक्रम ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस कथन की याद दिला दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि “नया कार्यकर्ता जुड़े या न जुड़े, लेकिन पुराना कार्यकर्ता नहीं टूटना चाहिए, वही पार्टी की रीढ़ होता है।”







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