प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण सम्पन्न, किसानों को दिए गए व्यवहारिक सुझाव

बांदा। प्रसार निदेशालय, कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा में 27 एवं 28 मार्च को “प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों का उत्पादन एवं उपयोग” विषय पर दो दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद, लखनऊ के सहयोग से आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में निदेशक प्रसार डॉ. एन.एन.के. बाजपेई, निदेशक अनुसंधान जगन्नाथ पाठक, बागवानी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार, डॉ. चंचल सिंह, डॉ. श्रीमती पुष्पा, डॉ. श्याम सिंह, केवीके बांदा के प्रमुख डॉ. मुकेश चंद तथा केवीके ललितपुर के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती से संबंधित महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की।

दूसरे दिन प्रतिभागियों को फील्ड विजिट कराई गई, जिसमें प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों के अनुभव साझा किए गए। जालौन के प्रगतिशील किसान लक्ष्मी नारायण चतुर्वेदी ने एक एकड़ मॉडल के माध्यम से प्राकृतिक खेती में बाजार की उपलब्धता और लाभ की विस्तृत जानकारी दी।

वहीं शिव शंकर चतुर्वेदी ने एक हेक्टेयर बागवानी को प्राकृतिक तरीके से विकसित करने की विधि समझाते हुए बताया कि मेड़ों पर महोगनी, चंदन व पपीता तथा खेत के भीतर नींबू, अमरूद और एप्पल बेरी जैसे पौधे लगाए जा सकते हैं। साथ ही इंटरक्रॉपिंग के रूप में हल्दी, चना, अदरक और अरबी की खेती से अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है।

कार्यक्रम में बुंदेलखंड क्षेत्र के विभिन्न जनपदों—हमीरपुर, ललितपुर, बांदा, महोबा, जालौन एवं झांसी—से प्राकृतिक खेती कर रहे प्रगतिशील किसानों को आमंत्रित किया गया, जहां प्रत्येक जनपद से दो-दो किसानों ने प्रतिभाग कर अपने अनुभव साझा किए।

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