“अम्बेडकर माह की गूंज: 135 गांवों में जागेगा संविधान और सम्मान का स्वर”

उरई। अप्रैल का महीना इस बार जनपद जालौन में सामाजिक जागरूकता और अधिकार चेतना के नए उत्साह के साथ शुरू हुआ है। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती को केंद्र में रखते हुए अम्बेडकर माह एवं दलित हिस्ट्री मंथ के रूप में पूरे जिले में व्यापक अभियान चलाने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच एवं दलित डिग्निटी एंड जस्टिस सेंटर की पहल पर इस वर्ष 135 से अधिक गांवों में बड़े पैमाने पर “डॉ. अंबेडकर जयंती”, “दलित सम्मान” और “न्याय सभा” आयोजित की जाएंगी। अभियान के संयोजक कुलदीप कुमार बौद्ध (एडवोकेट, हाईकोर्ट इलाहाबाद) ने बताया कि यह केवल आयोजन नहीं, बल्कि समाज में संवैधानिक मूल्यों के पुनर्जागरण का प्रयास है।

उन्होंने जानकारी दी कि इस अभियान के तहत 14 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है, जो पूरे जिले में भ्रमण कर डॉ. अंबेडकर की स्थापित प्रतिमाओं का सर्वेक्षण करेगी। यह टीम यह भी आकलन करेगी कि जिले में कितनी मूर्तियां स्थापित हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। सर्वेक्षण के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उत्तर प्रदेश शासन को भेजी जाएगी।

तहसील स्तर पर भी जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं—कालपी में अनीता देवी और सुरेंद्र कुमार, उरई में प्रदीप कुमार, जालौन में ऊषा देवी और देवेन्द्र अनिल, माधौगढ़ में सचिन चौधरी तथा कोंच में स्नेशराजा और रमेशचंद्र को कार्यक्रमों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रत्येक तहसील में कम से कम 14 पंचायतों में आयोजन सुनिश्चित किए जाएंगे।

इन आयोजनों की खास बात यह होगी कि गांव-गांव में समुदाय के लोगों के साथ मिलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया जाएगा, जिससे आमजन में अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़े। पूरे अप्रैल माह में चलने वाले इस अभियान का समापन 14 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर एक विशाल रैली और सभा के साथ होगा।

आज से इस अम्बेडकर माह की शुरुआत हो चुकी है और अब प्रतिदिन जिले के विभिन्न गांवों में कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी रहेगी। यह पहल न केवल बाबा साहब को श्रद्धांजलि है, बल्कि सामाजिक समानता, सम्मान और न्याय की दिशा में एक सशक्त कदम भी है।

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