एक युग का अवसान, अनुभवों की नई शुरुआत” — कठपुरवा विद्यालय में भावपूर्ण विदाई समारोह

उरई। उच्च प्राथमिक विद्यालय कठपुरवा का प्रांगण उस समय भावनाओं से सराबोर हो उठा, जब सेवानिवृत्त हो रहे शिक्षक प्रदीप चौहान के सम्मान में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि कैलाश स्वरूप बाजपेयी ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया, जिससे पूरे वातावरण में ज्ञान और श्रद्धा की दिव्यता फैल गई।

कार्यक्रम का संचालन विजय तिवारी ने अत्यंत सजीव और प्रभावशाली शैली में किया, जिससे समारोह में रोचकता और आत्मीयता बनी रही। उपस्थित शिक्षकों और अभिभावकों ने अपने विचार रखते हुए प्रदीप चौहान के व्यक्तित्व और कृतित्व को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

जिला कोषाध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जालौन के राकेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि “सेवानिवृत्ति केवल औपचारिक दायित्वों से मुक्ति नहीं है, बल्कि यह उस अनुभव, विचार और जीवन दृष्टि को समाज के साथ साझा करने का अवसर है, जिससे समाज निरंतर विकसित होता है।”

जिला संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजदेवर ने प्रदीप चौहान के समर्पण को याद करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा के आदर्शों को अपने आचरण में उतारकर समाज को नई ऊर्जा प्रदान की। वहीं ब्लॉक अध्यक्ष सत्यपाल ने भावुक शब्दों में कहा कि “शिक्षक जीवन में उनके अमूल्य योगदान की रिक्तता सदैव महसूस की जाएगी, किंतु हमें विश्वास है कि वे सेवानिवृत्ति के बाद भी हमारे मार्गदर्शक बने रहेंगे।”

समारोह में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के ब्लॉक पदाधिकारी—छुन्ना प्रसाद, आशीष कुमार, विजय कुमार, रमाकांत त्रिपाठी, दिलीप कुमार, रिजवान अहमद, पवन सोनी, संतोष कुमार, हरि सिंह, लोकेश कुमार, विनयदीप तिवारी, मुकेश कुमार, कपिल वर्मा, चंद्रपाल, संतोष गौर, राजेंद्र सेंगर, रविकांत, परमानंद, शिवेंद्र शेखर सहित एससी/एसटी संघ के प्रदेश सदस्य मिस्टर सिंह, प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष महेंद्र वर्मा, अखिलेश अवस्थी, श्री बाबू नगमा तथा अनेक गणमान्य अभिभावक—नंदकिशोर, सुरेश, रामकुमार, निरंजन लाल, भूरी देवी, फूल कुमारी, केसर आदि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में प्रदीप चौहान को स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। पूरे समारोह में एक ओर जहां उनके कार्यकाल की गौरवगाथा गूँजती रही, वहीं दूसरी ओर उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर मार्गदर्शन की कामना भी की जाती रही।

यह विदाई केवल एक शिक्षक की नहीं, बल्कि एक प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व के नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक बन गई।

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