📰
माधवगढ़–रामपुरा क्षेत्र में बर्बादी का मंजर, गेहूं-मूंग और सब्जी फसल चौपट
जालौन।
जनपद के माधवगढ़–रामपुरा क्षेत्र में शनिवार को हुई भीषण ओलावृष्टि ने किसानों को गहरा आघात पहुंचाया है। अचानक बदले मौसम ने ऐसा कहर बरपाया कि कई गांवों में आधा फीट तक ओले जम गए और खेत पूरी तरह सफेद चादर से ढक गए। इस आपदा से खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
यह ओलावृष्टि ऐसे समय पर हुई जब गेहूं की कटाई अपने चरम पर थी। किसान तैयार फसल को घर लाने की तैयारी में थे, लेकिन अचानक आई इस प्राकृतिक मार ने महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। जहां खड़ी फसल तबाह हुई, वहीं कटी हुई फसल भी ओलों और पानी से खराब हो गई।
ग्रामीण इलाकों, विशेषकर पचोखरा गांव से मिली जानकारी के अनुसार यहां के किसान मुख्य रूप से सब्जी खेती पर निर्भर हैं। बाजार में जाने को तैयार सब्जियां ओलावृष्टि में पूरी तरह नष्ट हो गईं। इसके अलावा गेहूं और मूंग की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है।
स्थानीय किसानों मेवालाल, प्रताप नारायण, शिवराम, गुलाब और रघुराज सहित करीब 50 किसानों की 2 से 3 बीघा तक फसल प्रभावित हुई है। अधिकांश किसान कुशवाहा समाज से हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह खेती, खासकर सब्जी उत्पादन पर निर्भर है।
किसानों ने बताया कि इससे पहले बाढ़ से भी नुकसान झेल चुके हैं और इस बार किसी तरह तैयार हुई फसल भी ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई। फसल बर्बाद होने से किसान सदमे में हैं और कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल सर्वे कराकर नुकसान का आकलन किया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही फसल बीमा योजनाओं के तहत शीघ्र राहत देने की अपील की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की असामयिक ओलावृष्टि जलवायु परिवर्तन के संकेत हैं, जो भविष्य में खेती के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। ऐसे में किसानों को त्वरित राहत के साथ दीर्घकालिक समाधान की भी जरूरत है।






Leave a comment