“उरई निवासी पूजा सुमित रावलानी ने अनुवादन में दिया महत्वपूर्ण सहयोग”
नई दिल्ली, 10 अप्रैल।
देश की राजधानी नई दिल्ली में शुक्रवार को सिन्धी भाषा दिवस बड़े ही गौरव और उत्साह के साथ मनाया गया। इस गरिमामयी अवसर पर महामहिम उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में देशभर से सिंधी समाज के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी तथा इंदौर से सांसद शंकर लालवानी की विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 200 सिंधी समाज के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे अपनी मातृभाषा सिंधी को संरक्षित एवं संवर्धित करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे। सभी ने यह शपथ भी ली कि वे दैनिक जीवन में अधिक से अधिक संवाद सिंधी भाषा में करेंगे, ताकि यह अमूल्य धरोहर सदैव जीवित रह सके।
इस अवसर पर उरई निवासी एवं सिन्धी भाषा की देश की प्रथम महिला JRF स्कॉलर पूजा सुमित रावलानी भी अपने परिवार सहित उपस्थित रहीं। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि यह दिन सिन्धी भाषा के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि 10 अप्रैल 1967 को सिन्धी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित किया गया था, और ठीक उसी ऐतिहासिक तिथि पर 10 अप्रैल 2026 को सिन्धी भाषा में अनुवादित भारतीय संविधान की पुस्तक का विमोचन किया जाना पूरे सिंधी समाज के लिए गर्व और सम्मान का विषय है।
इस ऐतिहासिक पहल में पूजा सुमित रावलानी ने भी अनुवाद कार्य में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है। उन्होंने इसे सिंधी भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।






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