एन एच पर वृद्ध को पड़ा दिल का दौरा , साइकिल से गिर कर मौत

उरई । खेती के लिए डीजल ले कर लौट रहे साइकिल सवार वृद्ध की दिल का दौरा पड़ने से एन एच पर गिर कर मौत हो गई । बाद में लोगों का जमघट मौके पर लग गया । पुलिस क्षेत्राधिकारी ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को सील बंद कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया ।

एट से डीजल ले कर  अपनी साइकिल से  लौट रहे बिलाया निवासी प्रेम नारायण तिवारी ( 65 वर्ष ) जखौली के सामने सड़क पर गिर पड़े जिससे राहगीरों की भीड़ इकट्ठा हो गई । पहले उनके एक्सीडेंट की अफवाह फैली लेकिन बाद में साफ़ हुआ कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है । खबर मिलने पर कोंच की सी ओ रुक्मणी वर्मा ने भी घटना स्थल का निरीक्षण किया ।

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घर की लाइट सुधार रहे युवक की करंट से मौत

उरई । घर की खराब लाइट ठीक कर रहे युवक को करंट लग जाने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई ।

जालौन कोतवाली क्षेत्र के गाँव कुठौन्दा बुजुर्ग में घर की लाइट गुल होने से उमेश दोहरे ( 28 वर्ष ) पुत्र चंद्रपाल खुद ही  सुधारने में जुट गया । इस दौरान जो तार उसने पकड़ा उसमें अचानक करंट आ गया जिससे जब तक घर के लोग समझ पाते वह छटपटाता हुआ जमीन पर गिर कर ढेर हो गया । बाद में जब तक घर के लोग दौड़े उसकी नब्ज थम चुकी थी जिससे घर में कोहराम मच गया  ।

घर में घुसा अजगर , पूरा गाँव बदहवास

उरई । जालौन कोतवाली क्षेत्र के गाँव में एक घर में अजगर के घुस आने से मचे हड़कंप के बाद वन विभाग की टीम उसे पकड़ने के लिए रवाना कर दी गई है ।

क्यामदी गाँव में डॉ लाखन सिंह निरंजन के घर एक अजगर घुस आया जिससे उनके परिजन ही बदहवास नहीं हो गए बल्कि पूरे गाँव में दहशत फैल गई । जालौन के उप जिलाधिकारी भैरों सिंह ने सूचना आने के बाद वन विभाग के एस डी ओ को उसे पकड़वाने की व्यवस्था करने  के लिए फोन किया । इसके बाद वन विभाग की इस काम के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित टीम को क्यामदी भेजा गया है ।

abhee -abhee जालौन के भवानीराम में किसान के घर चोरी, 4 लाख की चपत

उरई । जालौन में छत के रास्ते से कूद कर घर में दाखिल हुए चोरों ने नकदी सहित चार लाख रुपये का माल पार कर पुलिस को कड़ी चुनौती दी है ।

बताया गया है कि जालौन कस्बे के मोहल्ला भवानीराम में पंडित राम शरण के घर अज्ञात चोर घुस गए । हालांकि लाइट न आने की वजह से घर के लोग देर रात सो पाये थे फिर भी उन्हे चोरों की आहट नहीं मिल पायी । सुबह जागने पर घर के लोगों को सारा सामान तितर बितर देख कर जब वारदात का एहसास हुआ तो उनके होश उड़ गए । चोर उनकी 2 बहुओं का जेवर जिनकी कीमत सरसरी तौर पर चार लाख रुपये होने का अनुमान है और 19 हजार रुपये कैश तड़ ले गए । वारदात के शिकार हुए गृह स्वामी  पंडित राम शरण किसानी करते हैं ।

मामले की जानकारी पुलिस को दे दी गई है । कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक महाराज सिंह तोमर ने मौका मुआयना कर पड़ताल शुरू कर दी है लेकिन चोरों के बारे में अभी तक कोई क्लू नहीं मिला है ।

यह हेकड़ी मोदी को पड़ेगी भारी, कब तक सुरेश प्रभु की नालायकी को वे ढोएंगे

भारतीय रेल सेवा में लोगों को मौत के सफर का अख्स दिखाई देने लगा है। सुरेश प्रभु के रेल मंत्री कार्यकाल में जितने हादसे हो चुके हैं वे अपने आपमें एक रिकॉर्ड हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के गठन के समय मंत्रियों की नियमित अंतराल में समीक्षा और इसके आधार पर उन्हें पद पर बनाए रखने या हटाए जाने का निश्चय करने की कार्यनीति घोषित की थी। शुरू-शुरू में मंत्रियों को लग रहा था कि मोदी इराके के पक्के हैं इसलिए समीक्षा के नाम पर उनमें डर रहता था, लेकिन अब यह डर उनमें समाप्त हो चुका है क्योंकि मोदी सरकार ने किसी भी मंत्री को अभी तक परफॉर्मेंस खराब होने के आधार पर नहीं हटाया है। लगता है कि स्थायित्व की  भावना ने मंत्रियों को निश्चिंत कर दिया है। सुरेश प्रभु को इससे सर्वाधिक मनोबल प्राप्त हुआ है, इसलिए कोई हादसा उन्हें विचलित नहीं कर पाता।

एक हादसे के बाद अकाल मृत्यु के शिकार यात्रियों के परिवारों के प्रति संवेदना की रस्म अदायगी के बाद उसके सबक को भुला दिया जाता है, जिसके कारण रेलवे के संरक्षा तंत्र में मुस्तैदी लाये जाने की किसी योजना पर गंभीरता से अमल की बात अभी तक प्रकाश में नहीं आयी है। मुजफ्फरनगर के पास उत्कल एक्सप्रेस शनिवार की शाम दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें कई यात्रियों को जान गंवानी पड़ी। प्रारंभिक रूप से इस दुर्घटना की जो वजह सामने आयी है वह रेलवे प्रशासन की लापरवाही की ओर इंगित करती है। हर बार रेलवे की कमी ही हादसे की वजह बन रही है। जिसकी ओर से ध्यान मोड़ने के लिए जांच को आतंकवादी कार्रवाई बताने की दिशा में मोड़ दिया जाता है, लेकिन इस पैंतरेबाजी से किसका भला होगा।

एक ओर रेलवे में हादसे हो रहे हैं। यात्रियों को दिए जाने वाले खाने की बदतर क्वालिटी को लेकर उसके सिर बदनामी के ठीकरे फोड़े जा रहे हैं। दूसरी ओर ट्रेनों का किराया नई सरकार के गठन के बाद से बेतहाशा बढ़ाया जा चुका है इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि रेलवे के पास जरूरी इंतजाम करने के लिए संसाधनों का टोटा हो। यह बात दूसरी है कि रेलवे को जनआवागमन की सुविधा बनाए रखने की बजाय सरकार ने इसकी दिशा इलीट क्लास की बेहतरीन सवारी बनाने की ओर मोड़ दी है। इसलिए इन विसंगतियों पर गौर नहीं किया जा रहा है। आम यात्रियों की जेब ज्यादा से ज्यादा खाली कराकर वर्तमान सरकार बुलेट ट्रेन चलाने का खर्चीला ख्वाब पूरा करने में लगी है। जबकि बुलेट ट्रेन का किराया विमान किराये से भी ज्यादा होने की संभावना जताई जा चुकी है।

ऐसे में रेल सेवा के नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण से आम लोगों के हिस्से में क्या आने वाला है। राजद सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालूप्रसाद यादव ने रेलवे में हादसे के तांते को देखते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। भाजपा इसे राजनीति करार देकर खारिज कर सकती है क्योंकि यहां विपक्ष को संवेदनशील मुद्दों में भी राजनीति से बाज आना गवारा नहीं होता। भाजपा भी इस दुर्गुण से अछूती नहीं रही थी। जब वह विपक्ष में थी तो तत्कालीन सरकार की किसी भी विफलता के मौके पर इस्तीफे का राग अलापने से नहीं चूकती थी। अब इस दायित्व का निर्वाह गैर भाजपाई दल कर रहे हैं।

लेकिन जहां तक सुरेश प्रभु से इस्तीफा मांगने का मौजूदा संदर्भ है सचमुच रेलवे में पानी सिर से इतने ऊपर हो चुका है कि होना तो यह चाहिए कि सुरेश प्रभु स्वयं नैतिक आधार पर इस्तीफा देकर सरकार की लाज बचाएं। लेकिन अगर उनमें नैतिकता के लिए शहीद होने का जज्बा नहीं है तो प्रधानमंत्री को उन्हें बर्खास्त करने का पुनीत कार्य कर दिखाना चाहिए।

लेकिन अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि प्रधानमंत्री का हर बात में ईगो उनकी घातक सीमा बन गया है। राष्ट्रपति चुनाव के मौके पर गॉडफादर की तरह राजनीति के पालने में झुलाते हुए उन्हें आगे बढ़ाकर इस मुकाम तक लाने वाले लालकृष्ण आडवाणी भी उनके ईगो की चपेट में आने से नहीं बच सके। उनकी पार्टी और सहयोगी दल चाहते थे कि मोदी बड़प्पन दिखाते हुए लालकृष्ण आडवाणी को राष्ट्रपति पद का तोहफा पेश करें, लेकिन लालकृष्ण आडवाणी की आलोचना का उन्हें उनके अहसान से ज्यादा ध्यान रहा। इसलिए उनके ईगो ने यह स्वीकार नहीं किया कि जिसने उनका प्रतिवाद किया हो उससे प्रतिशोध लेने का कोई मौका अंतिम समय तक गंवाया जाए।

किसी मंत्री या मुख्यमंत्री को कितनी भी बड़ी चूक करने पर भी हटाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई कार्रवाई इसलिए नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे विपक्ष की जीत प्रदर्शित होगी और उन्हें कमजोर माना जाने लगेगा। लेकिन वांछनीय बदलाव में तो इस्पाती महिला कही जाने वाली इंदिरा गांधी भी नहीं चूकीं। सीमेंट घोटाला की चर्चा सीमा से ज्यादा होने पर उन्होंने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अब्दुल रहमान अंतुले की बलि ले ही डाली थी। जबकि वे उन पर अपना वरदहस्त बनाये रखने के लिए कटिबद्ध थीं। इसी तरह कई बार नाकामियों को लेकर भी उन्होंने मुख्यमंत्री और मंत्री हटाए पर इससे उनकी इस्पाती छवि दरकने की बजाय और ज्यादा मजबूत होती गई। अगर किसी मंत्री से जरूर होने पर भी इस्तीफा लिखवाने में प्रधानमंत्री को अपनी हेती महसूस होती है तो इससे उनकी मजबूत छवि न बनकर अंततोगत्वा उनकी छवि एक डरे नेता की बन जाएगी। पता नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को महसूस कर पा रहे हैं या नहीं।

गुणवत्तापूर्ण शासन बिना जवाबदेही के संभव नहीं है और हादसों दर हादसों के बावजूद अगर रेलमंत्री की जवाबदेही तय नहीं की जा रही तो इससे मोदी के शासन की सफलता पर प्रश्नचिन्ह लगना लाजिमी हो जाएगा। उत्कल एक्सप्रेस की दुर्घटना के संबंध में जो तथ्य प्रकाश में आये हैं उनके मुताबिक जहां काम हो रहा था वहां से ट्रेन 105 किलोमीटर की स्पीड से दौड़ी और उसकी वजह यह थी कि ड्राइवर को उस जगह रेलपटरी पर काम होने की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। यह तथ्य प्रारंभिक रूप से हादसे को रेल प्रशासन की घोऱ लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त है। अगर इस आधार पर प्रधानमंत्री मोदी रेल मंत्री को स्वयं ही अपने इस्तीफे की पेशकश के लिए प्रेरित करते हैं तो इससे सरकार की कार्यक्षमता पर लगे ग्रहण की बहुत हद तक भरपाई हो जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार भ्रष्टाचार को खत्म करने की डींगें हांक रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत दूसरी है। आम आदमी के मौलिक अधिकारों के भ्रष्टाचार की वजह से दमन के सिलसिले में पिछली सरकार की तुलना में कमी आने की बजाय बढ़ोत्तरी हुई है। रेलवे प्रशासन भी इससे अछूता नहीं है। यात्रियों के लिए खाने की घटिया क्वालिटी पर सीएजी की फटकार तो इसका एक नमूना है ही, आरक्षण में निजी काउंटर के जरिए ब्लैक और रेलवे के कार्यों में बेइंतहा कमीशनखोरी की चर्चाएं भी कम नहीं हैं। हादसों की एक वजह यह भी है। इस बारे में पहले से ही शिकायतें हो रही हैं। लेकिन प्रधानमंत्री दबंगी दिखाने के फेर की वजह से इन चर्चाओं को स्वीकार कर इस बाबत कोई जांच कराने को तत्पर नहीं हो रहे हैं।

यह बात सही है कि मोदी का जादू उनकी सरकार पर लगे तमाम प्रश्नचिन्हों के बावजूद अभी तक खत्म नहीं हुआ है। लेकिन यह जादू अजर-अमर नहीं है। अगर वे मुगालते में रहे और सुधार लाने की बजाय हेकड़ी से गलती करने वाले अपने सहयोगियों के कार्यों को जस्टिफाइ करते रहे तो उनके प्रति लोगों में मोहभंग का सिलसिला शुरू होते देर नहीं लगेगी और इस दिशा में अगर एक कदम भी लोगों ने आगे बढ़ा दिया तो उन्हें खारिज करने के लिए विस्फोट के स्तर पर जनमत का धमाका हो सकता है।

पवित्र रिश्ते को तार तार करने वाले हैवान को अदालत ने सुनाई जो सजा तो हिल गई शतान की औलादें

उरई । पवित्र रिश्ते को तार तार करने वाले बाप के ख़िलाफ़  अदालत ने नजीर  कायम करने वाला फ़ैसला सुनाया ताकि भविष्य में कोई इस हद तक नीचे गिरने का साहस न कर सके ।

मामला तीन वर्ष तक अपनी बेटी के साथ जबरन मुँह काला करते रहे बाप का है  । कलंकी बाप कुठौंद थाने के गाँव का मूल रूप से रहने वाला है । इसने सबसे पहले गाँव में ही ट्यूब वैल पर उसे अपनी हविश का शिकार बनाया । बेटी ने बहुत विरोध किया लेकिन इस जानवर को न तो दया आई न शर्म । इसके बाद वह उरई में तुफ़ैल पुरवा मोहल्ले में आ कर बस गया । इस बीच उसे ऐसी लत लग गई कि वह हर रोज बेटी के साथ हैवानियत को दोहराता था जिससे बेटी के लिए ज़िंदगी नरक बन गई थी । उसकी आत्मा चीत्कार करती थी लेकिन हैवान बाप को कोई ग्लानि महसूस नहीं हो रही थी ।

आखिर में अपनी बेबसी और दर्द को लड़की ने अपनी सहेली से शेयर किया जिसके बाद उसकी सलाह पर उसने बाप की नीचता का वीडियो बनाया और माँ को दिखाया । माँ सन्न रह गई । इसके बाद बिफरी माँ ने सारा लिहाज भूल कर अपने शैतान पति के ख़िलाफ़ कोतवाली उरई में मुक़दमा लिखा दिया । इसकी तारीख थी 14 जनवरी 2016। ए डी जे सेकंड श्रीनाथ सिंह की अदालत में यह केस चला । उन्होने 1 साल 18 महीने में ट्रायल पूरा  करके  जब फ़ैसले के लिए आज का दिन मुकर्रर किया तो सबकी निगाह टिकी थी कि इंसानी मूल्यों के इस हत्यारे को अदालत क्या सजा देती है ।

आखिरकार फ़ैसला सुनाते हुए जज साहब ने साफ़ कर दिया कि ऐसे अपराधी को कोई रियायत नहीं दी जा सकती । उन्होने अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा दी , साथ ही उस पर 5 लाख 10 हजार रुपये का दंड भी थोपा । बताया गया कि जिले में किसी आपराधिक मामले में यह अभी तक का सबसे ज्यादा अमाउंट का अर्थ दंड है ।

एडिशनल के दरबार में सकपकाए से बैठे रहे सेटर एस ओ

 

कोंच-उरई । जिले के अपर पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्रनाथ तिवारी ने शनिवार को कोतवाली में अधीनस्थों की क्लास लगाई और अपराधों पर रोकथाम के लिये आवश्यक दिशा निर्देश दिये। उन्होंने सर्किल में सबसे खराब प्रदर्शन करने बाले थानों को कड़ी चेतावनी देते हुये कहा कि लंबित विवेचनाओं का शीघ्र निपटारा कर उन्हें सामान्य लेबिल तक लायें वरना दंड भुगतने के लिये तैयार रहें, खासतौर पर कोंच कोतवाली में लंबित विवेचनाओं की अधिक संख्या पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई।

शनिवार को एएसपी सुरेन्द्रनाथ तिवारी ने कोतवाली कोंच में सर्किल के सभी चारों थानों कोतवाली कोंच, थाना कैलिया, थाना नदीगांव और थाना एट के थानेदारों और थाना प्रभारियों की कक्षा लगाई और उन्हें क्राइम कंट्रोल की घुट्टी पिलाते हुये विंदुवार अपराधों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पुलिस का सबसे पहला काम है अनुशासित ढंग से रह कर अपना काम करना और उम्दा रिजल्ट हासिल करना। उन्होंने कहा कि अपने दिये गये काम के प्रति पूरी तरह से सचेष्टï रहें, ऐसा करके तथा अपराधियों पर पैनी नजर रख कर वे अपराधों पर कारगर ढंग से नियंत्रण रख सकते हैं। उन्होंने बीट, गश्त और पिकेट को लेकर भी बताया कि किस प्रकार बीट बुक में दर्ज सूचनाओं के माध्यम से वे अपराधियों पर कारगर ढंग से अंकुश लगा सकते हैं। उन्होंने कहा कि परेशान नागरिक जब पुलिस के पास अपनी उम्मीदें लेकर आता है और उसे न्याय नहीं मिलता है तो उसकी पुलिस के प्रति नकारात्मक सोच बनती है, अत: फरियादी के साथ अच्छा व्यवहार करें, उसकी समस्या का समाधान करें। उन्होंने जनता और पुलिस के बीच बढिया तालमेल की जरूरत बताई। इस दौरान सीओ कोंच रुक्मिणी वर्मा, कोतवाल सत्यदेव सिंह, एसएसआई मनोजकुमार सिंह, दरोगा उमेश सिंह, घनश्याम यादव, अवधेश कुमार सिंह, एसओ नदीगांव रवीन्द्रकुमार त्रिपाठी, थाना कैलिया से नरेशसिंह पाल, सुदीश कुमार, बीएल आजाद आदि उपस्थित रहे।