उरई। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर जनपद न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा ने सभी न्यायिक अधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और वादकारियों को मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रहने की शपथ दिलाई। इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश ने कहा कि कभी भी किसी के अधिकारों में अतिक्रमण नही करना चाहिए। यही मानवाधिकार संरक्षण है।
द्वितीय जिला जज नंदलाल ने कहा कि परपीड़न से बड़ा अपराध कोई दूसरा नही है। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रामअचल यादव ने कहा कि बड़ी विडंबना है कि अपराधियों के मानवाधिकारों के संरक्षण की बात तो जोरशोर से होती है। लेकिन आम आदमी और पीड़ितों के मानवाधिकारों के प्रति गंभीरता नही दिखाई जाती। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीयूष तिवारी ने पैरा लीगल स्वयं सेवकों से अपील की कि वह पीड़ित जनों को हर संभव मदद पहुंचाने का प्रयास करें ताकि न्यायिक व्यवस्था की सार्थकता समाज के सामने बनी रह सके। विशेष न्यायाधीश श्रीनाथ सिंह, अनिल कुमार उपाध्याय, अपर जिला जज मनोज कुमार शुक्ला, विवेकानंद शरण त्रिपाठी, शिवदान यादव और न्यायिक मजिस्ट्रेट विवेक विक्रम ने भी विचार प्रकट किये।
इस मौके पर वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता रमाकांत द्विवेदी, शिवकुमार श्रीवास्तव, मुकेश निगम, राजकुमारी निषाद, ज्ञान प्रकाश स्वर्णकार, अनिल शर्मा, मंजूलता याज्ञिक, विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय प्रभारी अश्विनी कुमार और समस्त न्यायिक स्टाॅफ उपस्थित था।






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