उरई। राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए पुलिस के जरिए भेजे जा रहे समन लेने से पक्षकार कतरा रहे हैं। विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव पीयूष तिवारी ने इस सिलसिले में आज विज्ञप्ति जारी कर कहा कि ऐसा करना पक्षकारों के लिए अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारने जैसा है क्योंकि लोक अदालत की व्यवस्था उन्हें मुकदमों से छुटकारा दिलाने के लिए है।
उन्होंने बताया कि न्यायालय में लंबित छोटे-मोटे फौजदारी मुकदमें पक्षकारों के उपस्थित होने पर आपसी सहमति से निपटाने का प्रयास लोक अदालत में किया जाना है। इसलिए पुलिस के इस अदालत को लेकर समन से किसी भी पक्षकार को भयभीत होने की कोई जरूरत नही है। इसी तरह दीवानी मामलों के लिए न्यायालय के कर्मचारी नोटिस तामील करा रहे हैं। पक्षकार इन्हें लेने से बचकर अपने वाद के स्थाई निस्तारण का अवसर गंवा देंगें।
उन्होंने कहा कि इस बार की राष्ट्रीय लोक अदालत में सबसे महत्वपूर्ण बैंकों की बकाया वसूली को इसमें शामिल किया जाना है। बकायेदार इससे संबंधित नोटिस स्वीकार कर 12 दिसंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में उपस्थित हों। क्योंकि इससे उनको ब्याज में छूट का लाभ हासिल कर बकाया ऋण को सुविधानुसार किस्तों में जमा करने का मौका मिलेगा।






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