0 माधौगढ़ में 80 लाख रुपये के कंपनी के भुगतान पर रोक
उरई। हादसे और गंभीर बीमारी की चपेट में आये लोगों को तत्काल अस्पताल लाने के लिए शुरू 108 एंबुलेंस योजना जालसाजी का अड्डा बन गई है। माधौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से अटैच एंबुलेंस गाड़ियों की धोखाधड़ी का कारनामा उजागर होने के बाद इनका संचालन करने वाली कंपनी का अस्सी लाख रुपये का भुगतान रोक दिया गया है।
हादसे और गंभीर बीमारी के कारण मौत के मुंह में जा पहुंचे लोगों के जीवन दान का सहारा बनाकर चलाई गई 108 एंबुलेंस योजना शुरूआत में अच्छे रिजल्ट देने के बाद जालसाजी की राह पर चल पड़ने की वजह से बुरी तरह भटक गई है। माधौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सामने आये इसके किस्सों से प्रदेश भर में इस योजना को भ्रष्टाचार का पलीता लगाये जाने की बानगी उजागर हुई है।
बताया जाता है कि माधौगढ़ में एंबुलेंस के ड्राइवरों ने आठ-दस सिमंे निकलवा ली थी जिनसे वे 108 नंबर पर झूठी काॅल कराते रहते थे। इस तरह की काॅल के आधार पर उनकी लाॅग बुक में जिन गांवों में जाना और जिन मरीजों को लाना दर्ज था उनमें गाड़ी कभी गई नही थी और न ही उन नामों के मरीज किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती हुए थे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निर्देश पर 108 नंबर एंबुलेंस के दो प्रतिशत मामलों का सत्यापन होता है। इसी सत्यापन में उक्त फर्जी मामले पकड़े गये। जिसके बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है।
बताया जाता है कि कंपनी अपना गला बचाने के लिए ड्राइवरों की छुटटी करके मामले से पिंड छुड़ाने की फिराक में हैं। कंपनी के अधिकारी इसके लिए सरकारी अधिकारियों से सैटिंग भिड़ा रहे हैं। अगर उनकी मेहनत और लगन रंग लाई तो बाबू सिंह के जमाने में हुआ एनआरएचएम घोटाले जैसा यह घोटाला उजागर होने के पहले ही दफन हो सकता है।






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