0 बिना संयोजन गांव में कैसे हो वाटर सप्लाई
0 ग्रामीणों की मांग, जल संस्थान के सुपुर्द हो पेयजल योजना
कोंच-उरई। सूखा, वह भी बुंदेलखंड का, ऐसे में अगर ग्रामीण अंचलों की पेयजल योजनायें ध्वस्त पड़ी हों तो स्थिति की भयावहता आसानी से समझी जा सकती है। कोंच से महज तीन किमी की दूरी पर स्थापित ऊध्र्व जलाशय यानी पानी की टंकी आज सफेद हाथी की तरह खड़ी है। गांव में संयोजन भी नहीं बांटे गये हैं, यहां तक कि योजना के तहत जहां जहां लाइनें बिछानी जानी हैं वहां अभी तक लाइनें पहुंची ही नहीं हैं। ग्रामीणों ने इस जल संकट को लेकर प्रशासन से मांग की है कि यह टंकी जल संस्थान कोंच के सुपुर्द करके इसकी कमियां दूर करते हुये ग्रामीणों को इसका लाभ दिलाया जाये।
तहसील मुख्यालय से सटे गांव पडरी में नई पेयजल योजना बन कर तैयार खड़ी है लेकिन इसका लाभ अभी ग्रामीणों को मिल पाना दूर की कौड़ी दिखाई दे रही है। गांव के निवासी अधिवक्ता दीनानाथ निरंजन ने आज उपजिलाधिकारी कोंच को प्रार्थना पत्र देकर कहा है कि लोग बूंद बूंद पानी को तरस रहे हैं और टंकी सफेद हाथी की तरह अपनी उपस्थिति दर्शा रही है। इस योजना की सबसे बड़ी खामी तो यही है कि योजना के मुताबिक गांव में पाइप लाइनें ही नहीं बिछाई गई हैं। योजना के मैप में महादेव मंदिर तक लाइनें दर्शाई गईं हैं लेकिन हकीकत में वहां लाइनें डाली ही नहीं गई हैं। उन्होंने अंदेशा व्यक्त किया है कि उक्त टंकी ग्राम सभा अपनी सुपुर्दगी में लेने के लिये प्रयासरत है और अगर ऐसा होता है तो वाटर सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो जायेगी और मनमानी होगी। उन्होंने मांग की है कि इसे जल संस्थान को सौंपा जाये और जरूरत के मुताबिक लाइनें बिछवाईं जायें, ग्रामीण अपने खर्चे पर कनैक्शन लेने के लिये भी तैयार हैं।
टंकी का लाभ मिलना चाहिये ग्रामीणों को
जल संकट को लेकर गांव के निवासी हरगोविंद निरंजन पालीवाल का कहना है कि सरकार ने लाखों की लागत लगा कर यह पेयजल योजना तैयार कराई है लेकिन अगर उसका लाभ ही ग्रामीणों को हीं मिल सके तो इसका होना न होना बेमतलब है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि इसे अविलंब चालू कराया जाये ताकि ग्रामीणों को इसका लाभ मिल सके।
पानी की किल्लत दूर हो, चालू हो टंकी
गांव में सूख चुके कुंओं और दम तोड़ते हैंडपंपों की हालत देख कर इस टंकी के शुरू होने की महती जरूरत है, यह कहना है ग्रामीण छत्रसाल निरंजन का। उन्होंने कहा है कि अधिकारियों का यह दायित्व है कि वे इसका निरीक्षण करके इसकी कमियां अविलंब दूर करायें और जहां पाइप लाइनों की आवश्यकता है वहां बिछा कर जलापूर्ति सुनिश्चित कराई जाये।







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