(प्रमोद गौतम की रिपोर्ट)
24orai11उरई। सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड को लेकर जहां केंद्र और प्रदेश सरकार राहत के नाम पर केवल गाल बजाने में लगी हैं। वहीं बसपा के पूर्व सांसद ने अपने अंचल के पीड़ित अवाम के घावों पर मरहम लगाने की ठोस पहल के तहत जनपद जालौन में तालाब खुदवाने और सघन हरियाली का अभियान शुरू किया है। खास बात यह है कि इसके लिए वे किसी और के आगे हाथ पसारने की बजाय खुद की आमदनी लगा रहे हैं।
मालूम हो कि पिछले कई सालों से बुंदेलखंड सूखे की समस्या से जूझ रहा है और अब तो बुंदेलखंड को पानी की किल्लत ने भी जकड़ना शुरू कर दिया है। दुर्भाग्य की बात तो यह है कि सूखे और पानी की किल्लत से जूझ रहे बुंदेलखंड वासियों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार में बैठे मोदी और राज्य में बैठी अखिलेश सरकार ने वायदे तो बहुत सुहावने किये लेकिन उनको जमीनी हकीकत में नही उतार सके। जिस कारण आज भी बुंदेलखंड सूखा और प्यासा है।
यह है पूर्व सांसद का अपना प्रयास
इसी बीच अपने लोगों की त्राहि-त्राहि बसपा के पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी से नही देखी गई तो उन्होंने वायदे करने वाली सरकारों के बिना उनकी मदद करने का निर्णय लिया। जिसके चलते उन्होंने जनपद जालौन में निजी खर्चे पर गांव-गांव में तालाब खुदवाने शुरू कर दिये हैं तांकि बारिश होने पर तालाबों के भरने से किसानों को दूर तक लाभ हो सके।
हरियाली बढ़ाने में भी जुटे पूर्व सांसद
खाबरी ने इसके अलावा बुंदेलखंड में वृक्ष कटान से बिगड़ते पर्यावरण को सुधारने के लिए अपनी पत्नी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उर्मिला सोनकर के साथ मिलकर हरे पेड़ों को लगवाने का अभियान छेड़ दिया है। उन्होंने अब तक कई गांवों और सड़क किनारे हजारों वृक्षों को लगाया है। जब उनसे इस मामले की जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि इन पेड़ों से वातावरण में तो सुधार आयेगा ही साथ ही लोगों को चिलचिलाती धूप से भी राहत मिलेगी। अब तक उन्होंने जनपद जालौन के अंदर दो हजार से अधिक फलदार पेड़ो को लगवाया है। इन पेड़ों की वह स्वयं समय-समय पर देखभाल करते हैं।

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