cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। आठ वर्ष पहले राहुल गांधी सूखे की मार से कराह रहे जनपदवासियों की तकलीफों को मरहम लगाने सिकरी व्यास आये थे। लेकिन उनकी मेजबानी करने वाले इस गांव को उनके पदार्पण से अभी तक कुछ हासिल नही हुआ है न ही उन्हें कर्ज माफी का कोई फायदा मिला और न ही गांव के बांशिदों की प्यास बुझाने की योजना अमल में लाई गई।
राहुल गांधी के जिले के तीन दिन के दौरा कार्यक्रम से बेतवा किनारे स्थित सिकरी व्यास गांव में फिर से सुगबुगाहट शुरू हो गई है। राहुल अपने बुंदेलखंड दौरे में अभी तक जहां-जहां गये है वहां उन्होंने किसानों की कर्जा माफी और दस वर्ष तक चलने वाली सड़क बनाने का ढिढोंरा पीटा है। हालांकि 2008 में जब वे सूखे की परिस्थिति में जिले में आये थे तब भी उन्होंने ऐसी ही बातें कहीं थीं। लेकिन उनकी सिफारिश पर तत्कालीन मनमोहन सरकार द्वारा की गई कर्जा माफी की घोषणा से लाभान्वित वही हुए जो नेताओं और अधिकारियों के निकटवर्ती थे या क्रेडिट कार्ड धारक थे। जबकि उन्हें कोई लाभ नही हुआ जो कि राहुल के भरोसे के सहारे थे। के्रडिट कार्ड की हैसियत न होने से उनके हिस्से में कर्ज माफी का एक भी रुपया नही आया। इस छलावे के शिकार सिकरी व्यास के वे बड़े-बड़े रईस परिवार भी थे जिन्हें सूखे की मार ने भुखमरी की गर्त में धकेल दिया था।
तत्कालीन ग्राम प्रधान तुलसीराम, विद्याधर व्यास, ईश्वरधर व्यास का कहना है कि हमने राहुल जैसे बड़े नेता के हाशिये पर पड़े अपने गांव में आने को अपनी बड़ी खुशकिस्मती माना था लेकिन इससे उनका कोई भला होगा यह उम्मीद आखिर में मृग तृष्णा साबित हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद गौतम चच्चू का भी कहना है कि राहुल सिकरी व्यास के भोले-भाले लोगों के लिए एक फंतासी रचकर उड़नछू हो गये लेकिन आज जब इस फंतासी से लोग उबरे हैं तो अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। इसीलिए 18 सितंबर से शुरू होने जा रहे राहुल के तीन दिवसीय जनपद दौरे को लेकर सिकरी व्यास के निवासियों की प्रतिक्रिया बेहद तल्ख है। उनका कहना है कि राहुल के द्वारा दिखाये जाने वाले सब्जबाग से अब किसी पर कोई असर नही पड़ेगा क्योंकि काठ की हाड़ी एक बार ही चढ़ती है।

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