(डाॅ राकेश द्विवेदी)
cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। इस बार राहुल गांधी अपना बदला हुआ रूप लेकर आये। विपक्षी दलोें के तेज से बचने के लिए अपनी पप्पू वाली छवि को बलदकर परिपक्वता वाली चेहरे की बनावट कर ली और भाषा को प्रवाहमान बना उसमें पहले से ज्यादा आक्रामकता ले आये।
जिले वालों की आंधो में राहुल गांधी को तीन दिन रहना है। दो दिन बीत गये और तीसरे दिन का इंतजार है। आखिरी दिन कालपी जाकर वहां के लोगों में कांग्रेस के प्रति अपनत्व बढ़ाने का प्रयास करेंगे। राहुल गांधी पर अभी तक तमाम प्रकार के विशेषण थोपे गये। कुछ विशेषण राहुल को विचलित कर देने वाले रहे। उनमें खास तौर ‘पप्पू’ नाम का संबोधन है।
बंुदेलखंड यात्रा के दौरान वह अपनी पप्पू वाली इमेज से छुटकारा पाने की कोशिश में रहे। कद काठी और चिकने-चुपड़े चेहरे से वह पप्पू ही दिखते थे। बुंदेलखंड में बहुत पहले से दाढ़ी का क्रेज है। नेताओं को छोड़िये स्टूडेंट तक चेहरे पर दाढत्री रखना पसंद करते हैं। कहते हैं कि इसमें वे अपना रुआब झलकता देखते हैं। राहुल इन दिनों चेहरे पर हल्की दाढ़ी रख रहे हैं। उन्हें लगा कि इसमें उनकों पप्पू वाली इमेज से छुटकारा मिलेगा। इसके अलावा जिले में उनके भीतर एक और बदलाव दिखा। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए लड़का शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। जब भी उनका नाम लेने का अवसर आया तो अखिलेश जी ही कहकर बुलाया। दरअसल अखिलेश यादव ने राहुल द्वारा लड़का कहने पर न सिर्फ आपत्ति जताई थी बल्कि गुस्सा दूर करने को राहुल को भी लड़का कहकर हिसाब-किताब बराबर किया था। राजनीतिक मुददों की ट्रेनिंग ले रहे राहुल को भी इस गलती का अहसास हुआ है। उन्हें लगा कि एक मुख्यमंत्री को लड़का कहकर नही संबोधित किया जाना चाहिए था।
बारंबार पप्पू कहकर भाजपा ने राहुल गांधी को बहुत चिढ़ाया था। इसीलिए अब वे इस भ्रमण यात्रा के दौरान चेहरे की ऐसी बनावट के साथ उतरे हैं जिसमें उनकों पप्पू नही कहा जा सकता। पप्पू जैस दिखने की छवि को उतार फेंक परिपक्व दिखने वाला रूप धारण किया है। इस बार उनके संवाद में आक्रामकता भी बढ़ी नजर आई है। किसानों के बीच संवाद में कोई भी अंग्रेजी शब्द नही बोल रहे हैं। हां भइया वाला तकिया कलाम बदस्तूर जारी है।

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