उरई। राहुल गांधी की लिखित भाषण की लीक से अलग न हट पाने की कमजोरी आज के दौरे में आयोजित कई जनसभाओं में झलकीं। उनके दौरे के बीच में ही भारतीय सैनिकों को शहीद किये जाने का भयानक कांड कश्मीर में हो गया। जिसको देखते हुए लोग उम्मीद कर रहे थे कि उनके भाषण का रुख बदल जायेगा और वे अपनी सभा में प्रमुखता से कश्मीर के मुददे का जिक्र करेगें लेकिन उनके ऐसा न करने से लोग न केवल नाउम्मीद हुए बल्कि कई लोगों में इसे लेकर क्षोभ भी झलका।
राहुल गांधी रविवार को जब कोंच में खाट सभा कर रहे थे उस समय सभा की शुरुआत के पहले उन्होंने कश्मीर में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में आधा मिनट का मौन रखा। लेकिन इस बीच में उन्हें अपने भाषण राइटर से इस मुददे पर मंच से क्या बोला जाये इसकी स्क्रिप्ट नही मिल पाई जिसके चलते कल से आज तक जिले में उन्होंने लगभग आधा दर्जन नुक्कड़ सभाएं संबोधित की पर सबसे सामयिक और ज्वलंत मुददे के बारे में वे कोई विचार नही रख सके।
रटे-रटाये भाषण तक सीमित रहने की उनकी दुर्बलता की नजीर आज के दिन बजरिया में उनकी पहली ही सभा में देखने को मिल गई। यह सभा मुस्लिम बाहुल्य इलाके में हो रही थी जिस इलाके के ज्यादातर लोगों का किसानी से कोई लेना देना नही है। लेकिन उन्होंने किसानों की कर्जमाफी के मुददे का ही रोना रोया। जब वे भाषण खत्म करके चुप हो जाने वाले थे तभी रथ मे सवार चल रहे किसी कांग्रेसी कार्यकर्ता ने फुसफुसाते हुए उन्हें याद दिलाया कि इसमें यहां मौजूद आॅडिएंस के मुताबिक कोई बात नही हो पाई है। इसके बाद अचकचाए राहुल दोबारा स्टार्ट हो गये और उन्होंने नरेंद्र मोदी को दंगों का मास्टर माइंड साबित करते हुए कुछ बातें कहीं जो उपस्थित लोगों को भी पसंद आई जिससे उनमें जोश आ गया और प्रतिक्रिया स्वरूप राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगने शुरू हो गये। इसी तरह सर्राफा बाजार में उन्होंने स्वर्णकारों के द्वारा मोदी सरकार की इंस्पैक्टर नीति के विरोध में चलाये गये आंदोलन के अनुरूप अपने भाषण को नही गढ़ पाया। यहां भी वे किसानों के मुददे पर ज्यादा केंद्रित रहे साथ में छोटे व्यापारियों की संवेदनाओं को छूने की उन्होंने जो कोशिश की वह बेतरतीब रही। राहुल गांधी को इस दौरे से यह सबक जरूर लेना चाहिए और अगर वे इस बारे में जागरूक न हो सकें तो टीम पीके को उन्हें बताना चाहिए कि सघन सभाओं के कार्यक्रम में रटे-रटाये भाषण पर निर्भर रहने की बजाये उनके लिए हाजिर जबाव होने का गुण सीखना कितना जरूरी है।






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