उरई। नेहरू बाल मन्दिर के पास कुछ वर्षों से दशहरे से दीपावली तक सजवाई जा रही आतिशबाजी की दुकानों पर इलाके के लोगों ने गम्भीर ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में बारूद की दुकानों का होना जनसुरक्षा के लिए भारी खतरा है। इस मामले में यहां गलत शुरुआत हुई है जिसे अब परम्परा का रूप दिया जा रहा है। लेकिन कोई बड़ी जनहानि हो इसके पहले ही यहां के आतिशबाजी बाजार को किसी निरापद स्थान पर शिफ्ट करने का कदम प्रशासन को उठा लेना चाहिए।
राजकुमार चतुर्वेदी, देवेन्द्र दुबे, अमित कुमार, अवनीश चतुर्वेदी, दीपू यादव, छोटे समाधिया, कमलेश चतुर्वेदी, अविनाश तिवारी, आशीष चतुर्वेदी सहित दो दर्जन लोगों ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित ज्ञापन जिलाधिकारी संदीप कौर को सौंपा। जिसमें उन्होंने बताया कि इससे पहले वे उपजिलाधिकारी को भी कई ज्ञापन देकर सुझाव दे चुके हैं कि दशहरे से दीपावली तक आतिशबाजी का अस्थाई बाजार ऐसी जगह खुले मैदान में लगवाया जाय जहां आबादी न हो।
लोगों ने कहा कि सुरक्षा के अलावा इस इलाके में रहने वाले लोगों को आतिशबाजी की दुकानों के कारण अन्य परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। दुकानों की चहल-पहल की बजह से यहां की सड़क तंग हो जाती है। इसलिये सड़क से होकर चार पहिया वाहन निकालने में भारी समस्या का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में अगर कोई हादसा हो जाए तो अग्तिशमन वाहन भी भीड़ के कारण आसानी से मौके पर नहीं पहुंच सकता। गत वर्ष जरा सी चिंगारी पड़ जाने के कारण आतिशबाजी बाजार में भगदड़ मच गई थी। फिर भी सबक नहीं लिया गया। उन्होंने जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि वे इस मामले की नजाकत को समझकर आतिशबाजी की दुकानें स्थानान्तरित करने का कदम जरूर उठाएंगी।

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