उरई। मातृशक्ति की वंदना का प्रतीक नवरात्र पर्व शनिवार से शुरू हो गया। इस दौरान नौ दिन देवी को अलग-अलग स्वरूप में पूजने का विधान है। इस पर्व की प्रासंगिकता महिला हिंसा केे वर्तमान दौर में नए सिरे से स्थापित हुई है। इसलिए बहुत से लोगोें में धार्मिक आस्था के साथ इस पर्व के भौतिक संदेश को लेकर भी उत्साह दिखाया जा रहा है। 
महिलाओं का मनोबल बढ़ाने और समाज में उन्हें गरिमा के साथ देखने की भावना को बल देने वाला नवरात्र पर्व भारतीय त्यौहारों की अनोखी विरासत का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। जिले में यह पर्व व्यापक उत्साह और धार्मिक भाव से मनाया जाता है। नगर के प्रमुख देवी मंदिरों में इस पर्व के लिए भव्य साज-सज्जा की गई है। पहले दिन पौ फटने के पहले से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिरों पर देवी दर्शनों के लिए उमड़ी। विशेष रूप से महिलाएं और कन्याएं दर्शनार्थियों में सबसे आगे शामिल रहीं।
देवी पूजा को शक्ति पूजा का भी नाम दिया गया है और इस अवलम्ब के साथ देवी पूजा की परंपरा से रहस्य रोमांच पैदा करने वाली कई किवदंतियां भी जुड़ी हैं। शहर भी इन किवदंतियों से अछूता नहीं है। वर्तमान पीढ़ी में बहुत से लोग पटेल नगर स्थित डिग्गी ताल के देवी पूजा की दृष्टि से अलग महत्व से अंजान हैं। लेकिन वे यह जानकर चैंक सकते हैं कि माहिल के राज्य के समय यह स्थान चौसठ योगिनियों के वास के लिए जाना जाता था। तब इस स्थान का नाम डिग्गी ताल नहीं चौसट्ठी ताल था। यह स्थान उस समय अत्यंत जागृत अवस्था में था। जहां लोग सिद्धि प्राप्त करने के लिए नवदुर्गा के समय विशेष पूजा करने दूर-दूर से आते थे।






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