19orai01 19orai02उरई। बिजली विभाग के एक कारनामें को सुनकर आप चैंक पड़ेगे। रंगदारी वसूलने वाले गुंडो से भी ज्यादा जबर्दस्ती दिखाने का बिजली विभाग का एक उदाहरण रामपुरा ब्लाॅक में सामने आया है। ब्लाॅक की निनावली ग्राम पंचायत के किशुनपुरा गांव में लगभग दो दशक पहले बिजली विभाग ने खंभे गड़वाकर लोगों के घरों में रोशनी के इंतजाम का सब्जबाग दिखाया था जो आज तक जमीन पर नही उतर पाया है। लेकिन विभाग ने इस गांव के लोगों को दस-बारह हजार रुपये का बिल भेजकर हैरत में डाल दिया है। ऊपर से बिल जमा न करने पर घरों की कुर्की करा देने का फरमान बिजली विभाग के अधिकारी गांव वालों को भिजवा रहे हैं।
लगभग एक हजार की आबादी का किशुनपुरा गांव बीहड़ों की गोद में बसा है। इस गांव के लोग पंचनद के खूंखार डकैतों के आतंक के भुक्तभोगी रहे हैं लेकिन उन्हें नही मालूम था कि सरकारी विभाग इन डकैतों से भी ज्यादा जबर्दस्ती करते हैं।
तत्कालीन भाजपा विधायक संतराम सिंह सेंगर ने इस गांव को विद्युतीकरण के प्लान में शामिल कराकर यहां खंभे पहुंचवाये थे लेकिन विभाग के लोगों ने बाद में तार तक नही खिचवाये। अगर जांच हो जाये तो पता चलेगा कि विभाग के लुटेरे इंजीनियरों ने बिना तार खिचवाये और ट्रांसफार्मर लगवाये इस गांव के विद्युतीकरण कार्य की एमबी कर दी और सारा बजट डकार गये। होना तो यह चाहिए था कि इसके लिए उन्हें सूली पर लटकाया जाता लेकिन वाह री! सरकार और प्रशासन जिसे इंजीनियरों की लूटपाट का पता ही नही चलता। वह तो आम जनता को ही इन भेड़ियों का ग्रास बनने के लिए परोसे हुए है।
उस समय बिजली विभाग की धुप्पल में कुछ गांव वालों ने कनेक्शन ले लिये थे। आज वे ही ईमानदारी दिखाने वाले लोग चपेट में आ गये हैं। उनके पास बिल के साथ-साथ अदायगी न होने पर कुर्की का फरमान पहुंच रहा है।
इस संवाददाता ने कुछ घरों में जाकर देखा जिनमें लड़के की हाल में शादी होकर आई थी। उनके दहेज में मिले विद्युत उपकरण प्रयोग न हो पाने की वजह से इस्तेमाल में आने से पहले ही कबाड़ में तब्दील दिखाई देने लगे हैं। गांव वालों ने बताया कि ऐसा नही है कि प्रशासन को बिजली विभाग की कारगुजारी के बारे में कुछ पता न हो। कई बार तहसील दिवस में विद्युतीकरण पूरा कराने के ज्ञापन उन्होंने दिये लेकिन कोई जांच नही हुई। उन्होंने बिल भिजवाने वाले इंजीनियरों को निलंबित कर प्रशासन से अपनी भूल सुधारने की गुहार लगाई।

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