medical-collegecropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। जिले में राजकीय मेडिकल काॅलेज अस्पताल की सौगात मरीजों के लिए छलावा बन कर रह गई है। जनपद में भी डेंगू का कहर लोगों पर बुरी तरह टूट रहा है। जिससे मेडिकल काॅलेज अस्पताल में मरीजों का तांता लगा है। लेकिन मेडिकल काॅलेज अस्पताल में बुखार उतारने की साधारण पैरासीटामोल टेबलेट तक नही है।
मेडिकल काॅलेज का नाम आने पर लोगों के जहन में उन्नत चिकित्सीय सुविधाओं से लैस उपचार केंद्र की तस्वीर उभरती है। लेकिन यहां के मेडिकल काॅलेज के बारे में ऐसी कोई कल्पना मूर्खता नजर आती है। नाम बड़े, दर्शन छोटे की कहावत का चरितार्थ रूप बने इस मेडिकल काॅलेज की हकीकत को डिसपेंसरी से भी ज्यादा बदतर रूप में देखा जा सकता है।
मेडिकल काॅलेज के आउटडोर में हर दवा और जांच बाहर के लिए लिख दी जाती है। जो लोग अस्पताल से बेहतर इलाज की उम्मीद लिए शहर से इतनी दूर मेडिकल काॅलेज अस्पताल आते हैं उन्हें अपने साथ बड़ा धोखा होने का अनुभव लेकर लौटना पड़ता है। मंगलवार को मेडिकल काॅलेज में बुखार न ठीक होने की शिकायत लेकर पहुंचे विनय दिवाकर ने बताया कि उन्हें सारी दवाएं और जांच बाहर से कराने के लिए लिख दिया गया जबकि उन्होंन इस पर काफी विरोध जताया। बुधवार को मेडिकल काॅलेज से नाजुक हालत में रेफर सुनील उर्फ जानी के परिवारीजनों ने बताया कि उन्होंने इस अस्पताल में लाकर अपने लड़के की जिंदगी खतरे में डाल दी। उसकी प्लेटे भर्ती होने के लिए 3 लाख से ऊपर थी। जबकि डिस्चार्ज कराते समय प्लेटे बढ़ने की बजाय कम होकर 1 लाख 92 हजार रह गईं। बाहर से दवा मंगाने और जांच कराने में उनका 50 हजार रुपया अलग खर्च हुआ। डाॅक्टरों की बदमीजी की भी पराकाष्ठा है। ग्लूकोज की बोतल को लेकर एक महिला डाॅक्टर का बेहूदा जबाव था कि क्या सरकार ने तुम्हारा ठेका लिया है जो फ्री में बोतल चढ़ाई जाये।
हालांकि मेडिकल काॅलेज प्राइवेट पैथलाॅजी सेंटर और मेडिकल स्टोरों के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी साबित हो रहा है। ऐसा लगता है कि करोड़ों रुपये की लागत से मेडिकल काॅलेज का निर्माण इन्ही लोगों की जेब भरने के लिए कराया गया है।
उस पर तुर्रा यह है कि डाॅक्टर यहीं स्थापित हुए एक प्राइवेट नर्सिंग होम के कमीशन एजेंट बन गये हैं। वे हर मरीज को इस नर्सिंग होम में शिफ्ट करा देते हैं जहां आॅपरेशन से लेकर इलाज तक में मरीज की जमकर लूटखसोट होती है। जिसमें मेडिकल काॅलेज के डाॅक्टरों को भी अपनी जेबे गरम करने का अवसर खूब मिलता है।
शायद सीएम को मेडिकल काॅलेज अस्पताल के इस आलम का पता नही होगा। जबकि उनके पार्टी के जनप्रतिनिधियों और नेताओं को फुर्सत नही है कि वे सीएम को मेडिकल काॅलेज की इस दुर्दशा से जनपद के लोगों में सरकार के प्रति पनप रहे असंतोष के बारे में उन्हें चुनाव के कारण पार्टी के हित की चिंता करते हुए तत्काल बतायें। उल्टे यह लोग मेडिकल काॅलेज के भ्रष्ट तंत्र के साथ चोर-चोर मौसेरे भाई का रोल अदा कर रहे हैं।

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