माधौगढ़-उरई। पीएम मोदी द्वारा केंद्रीय प्रशासन को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के दावे की कलई बैंकों का स्टाॅफ नोट बंदी से उपजी परिस्थितियों में लूट खसोट मचाकर खोल रहा है। बैंकों की कार्य प्रणाली यह उजागर कर रही है कि राज्य सरकार के विभागों से कहीं ज्यादा निरंकुश भ्रष्टाचार वर्तमान शासन के कार्यकाल में केंद्रीय विभागों और उपक्रमों में व्याप्त हो चुका है।
स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा में सफेदपोशों और चहेतों को लेन-देन किया जा रहा है जबकि आम ग्राहक आसपास के गांवों से रोज आते हैं और लाइन में लगे-लगे बैरंग लौटा दिये जाते हैं। संदेह यह है कि बैंक का यहां का स्टाॅफ काले पैसे को सफेद कराने में भूमिका अदा कर रहा है। कुछ दिनों पहले परेशान जनता ने बबाल कर दिया था तो पुलिस ने भी उस पर लाठियां भांजी थी। चूंकि पुलिस की इस कारगुजारी में मिलीभगत है। सोमवार को भी पुलिस और बैंक स्टाॅफ की जुगलबंदी से आम ग्राहकों को फिर परेशान किया गया। जिससे लोगों का गुस्सा सांतवे आसमान पर पहुंच चुका है और अगर उच्चाधिकारियों ने हस्तक्षेप न किया तो एक-दो दिन में लोगों की उग्र प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
उधर कुठौंद के पास मदारीपुर में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में खुलते ही कैश न होने की घोषणा कर दी जाने से लोगों ने जालौन-औरैया प्रांतीय मार्ग पर जाम लगा दिया। तनाव बढ़ने पर एसडीएम जालौन शीतला प्रसाद यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को किसी तरह शांत करके जाम खुलवाया। ध्यान रहे कि इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की शाखाओं में शेखपुर अहीर से लेकर पूरे जिले भर में चीन्ह-चीन्ह कर नोटों की रेवड़ियां बांटे जाने की शिकायतें मिल रही हैं लेकिन शायद बैंक अध्यक्ष और जीएम तक ऊपरी कमाई की बंदरबांट का जो धंधा चल रहा है उसकी वजह से बबाल पर बबाल होने के बावजूद शाखा प्रबंधक बेखौफ हैं। कमोवेश सारी बैंकों का यही आलम है जो केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली का आइना समझी जा सकती है।






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