उरई। स्वास्थ्य विभाग में 70 से अधिक संविदा रिक्तियों के लिए भर्ती की प्रक्रिया तीसरी बार सोमवार से फिर शुरू कर दी गई। इसके पहले दो बार उक्त भर्ती को अनियमित प्रक्रिया के कारण रदद किया जा चुका है। मजे की बात यह है कि पहले दो मर्तबा चली भर्ती प्रक्रिया में डाॅ. आशाराम की अध्यक्षता वाली चयन समिति को गड़बड़ी का सरसरी तौर पर दोषी माना गया था लेकिन नये सिरे से फिर शुरू हुई चयन प्रक्रिया की बागडोर बावजूद इसके उन्ही आशाराम के हाथ में कार्यवाहक सीएमओ होने के नाते सुपुर्द है।
संविदा भर्तियों के लिए पहले दिन सैकड़ों अभ्यर्थी अपने दस्तावेज लेकर सीएमओ दफ्तर पहुंचे। उधर यह चर्चा गर्म रही कि चयन समिति के सदस्यों के दलाल पहले से ही सक्रिय हो गये थे। जिन्होंने अभ्यर्थियों के घर में जाकर अच्छी खासी रकम जमा कराई। हालांकि कार्यवाहक सीएमओ डाॅ. आशाराम इन बातों को बेसिर-पैर के आरोप करार देकर खारिज कर रहे हैं।
भर्ती के लिए अभ्यर्थियों से वसूली की चर्चा को साबित करने का कोई ठोस सबूत भले ही न हो लेकिन जिस तरह से पारदर्शिता के मानदंडों की अवहेलना इसमें की जा रही है उसे देखते हुए उंगलियां उठाने वाले कुछ मामले में अपनी जगह दमदार प्रतीत हो रहे हैं।
भर्ती में सिर्फ साक्षात्कार के अंक निर्णायक होंगे जबकि चयन समिति में मात्र सीएमओ और उनके मातहतों के ही शामिल होने से इसका स्वरूप एकदम मनमाना हो गया है। दरअसल चयन समिति के गठन में मुख्य सचिव तक के निर्देशों की अवहेलना की गई जिससे इसमें स्वेच्छाचारिता को बल दिये जाने की धारणा को और मजबूती मिली है।
भर्ती के अगर पारदर्शी मानक बनाये जाते तो मनमानी की एकतरफा गंुजाइश बची नही रह सकती थी। होता यह है कि हाईस्कूल, इंटर व ग्रेजुएशन में प्राप्त अंक प्रतिशत के आधार पर नंबर तय किये जाने की व्यवस्था चयन प्रक्रिया में निर्धारित की जाती रही है। पारदर्शिता के लिए आवश्यक इस तरह के मानक निर्धारित करके जिला स्वास्थ्य समिति से उनका अनुमोदन कराया जाना चाहिए था। तभी प्रक्रिया वैध बनी रह सकती थी। लेकिन कार्यवाहक सीएमओ ने इस जरूरी औपचारिकता को पूरा कराने की जरूरत नही समझी।
मनमानी चयन प्रणाली से नाराज कुछ अभ्यर्थियों ने स्वास्थ्य विभाग खुद संभाल रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को शिकायत भेजकर योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय रुकवाने के लिए गुहार लगाई है। इसको देखते हुए तीसरी बार भी भर्ती के रिजल्ट को हरी झंडी मिलने में अवरोध माना जा रहा है। जिसकी वजह से दलालों के चंगुल में फंसकर दुहे जा चुके अभ्यर्थियों के होश बैरंग हैं।





Leave a comment