उरई। जिले में मिटटी खनन पर कुछ दिनों तालाबंदी रही लेकिन अब इस धंधें में फिर से बहार आ गई है। प्रशासन की उदासीनता और अनदेखी के कारण कई जगह अवैध रूप से हर रोज दर्जनों टैªक्टरों से खेत खोद कर मिटटी उठवाई जा रही है। पर्यावरण के लिए खतरे की पदचाप सुनाने के अलावा अवैध मिटटी खनन का यह कारोबार सरकारी राॅयल्टी की लाखों रुपये की चोरी का सबब भी बना हुआ है।
खनन को लेकर विपक्षी नेताओं के ताबड़तोड़ हमलों और अदालतों में सरकार की छीछालेदर से घबराकर प्रशासन को इस पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दे दिये गये थे। मौरंग खनन के साथ-साथ मिटटी खनन का काम भी पिछले चार सालों में जितने बड़े पैमाने पर हुआ उससे पहले कभी इस कदर इंतहा नही की गई थी। इसलिए खेत खाईयों में तब्दील हो गये जिनमें आये दिन हादसे होने का खतरा मंडराने लगा है।
मिटटी खनन में सबसे ज्यादा रोजगार दबंगों को मिला है। उनके लिए यह धंधा हर्र लगे न फिटकरी, रंग चोखा की कहावत को चरितार्थ करने वाला साबित हुआ। एक धेला की राॅयल्टी चुकाये बिना हर रोज दबंगों ने इसमें लाखों कमाये। जिससे खूंखार माफियाओं की एक बड़ी खेप जिले में पनप गई। अपराध जगत में भी दूर तक इसका असर रहेगा। लेकिन शायद नमक हलाली प्रशासन के खून में नही रह गई है। इसलिए अधिकारियों को मिटटी खनन को प्रोत्साहन देते समय अपने फर्ज की कोई कचोट महसूस नही होती।
फिर भी हाईकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट के डंडे से प्रशासन ने कुछ माह तक अवैध मिटटी खनन में भी स्टोपर लगाये रखा लेकिन मामला ठंडे बस्ते में जाते ही फिर से पर्दे के पीछे से मिटटी खनन माफियाओं की हौसला अफजाई की जाने लगी है। कस्बा जालौन में प्रतापपुरा के पास रात 12 बजे के बाद जेसीबी धरती का सीना चीरने के लिए चलने लगती है और दर्जनों ट्रैक्टरों का तांता इस मिटटी को भरकर बेचने के लिए निकलते देखा जाता है। ऐसा नही है कि रात में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की गस्त न होती हो सड़क से ही खनन की कारगुजारी नजर आती है लेकिन सांठगांठ की वजह से ही गस्त करने वाले किसी माफिया को खनन करने से रोकने-टोकने की जहमत अधिकारी नही उठाते। चुंगी नं.-4 जहां से मिटटी भरे ट्रैक्टर निकलते हैं वहां पर पुलिस यातायात माह को देखते हुए चैकिंग अभियान भी पूरे महीने चलाती रही लेकिन उसके जाल में मिटटी भरा कोई ट्रैक्टर नही फंस पाया जो किसी करिश्में से कम नही है। कहा यह जाता है कि मुख्य मार्ग पर दो लोग डंडा लेकर ट्रैक्टरों को निकालते रहते हैं। इस खनन का सूत्रधार औरैया रोड पर चलने वाले ढाबे का दबंग संचालक बताया जाता है।
उधर उरई शहर में अवैध रूप से घाटों से खोद कर लाई जा रही बालू को स्वर्गधाम के सामने कुछ माफियाओं द्वारा खुले आम डंप कराया जा रहा है। यह डंप भी प्रशासन की निगाह से अदृश्य नही हो सकता। स्वर्गधाम के सामने उक्त स्थान से प्रतिदिन 20-30 ट्रक मौरंग बेचने के लिए ले जाई जा रही है। मोहल्ले वाले स्वर्गधाम के सामने बालू के डंप बनाये जाने की शिकायत स्थानीय चैकी में दर्ज करा चुके हैं लेकिन फिर भी अभी तक कोई एक्शन इस पर नही किया गया है।
उधर कोटरा में नदी पर बने कच्चे पुल के पास व सिकरी व्यास में ट्रैक्टरों से अवैध रूप से उठाई जा रही बालू की बड़ी अडिडयां बना ली गई हैं। जानकारों का कहना है कि स्थानीय पुलिस अवगत होते हुए भी बालू माफियाओं के सामने नतमस्तक होने की वजह से कार्रवाई नही कर पा रही है।





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