उरई। विजय नगर में हुए तिहरे हत्याकांड का खुलासा हो गया है। हाल के दिनों में जिले के इस सबसे बड़े ब्लाइंड मर्डर केस की सुई कहीं और घूम रही थी लेकिन कातिल दूसरे निकले। न तो सुरेंद्र तिवारी की बहू का हाथ इसमें साबित हुआ और न ही उनके बिजनिस पार्टनर गोस्वामी पर जाहिर किया जा रहा संदेह सही निकला। दो कातिलों में से एक घटना के अगले ही दिन किसी दूसरे मामले में ग्वालियर में जेल में बुक हो गया था। जिला पुलिस के हत्थे चढ़े उसके दूसरे साथी ने कत्ल के पूरे घटना क्रम और उसकी वजह की जानकारी पुलिस को दी।
विजय नगर में सुरेंद्र तिवारी (62वर्ष) उनकी पत्नी अभिलाषा तिवारी (55वर्ष) तथा उनके पुत्र कार्तिक उर्फ डिंपू (26 वर्ष) के अपने ही मकान में मरे मिलने की सनसनी खेज वारदात को लेकर पुलिस अंधेरे में हाथ-पांव मार रही थी। लेकिन इसी अंधाधुंध प्रयास में कानून के हाथ कातिलों के गिरेबान तक पहुंचा दिये। इस मामले में गिरफ्तार किये गये ग्वालियर निवासी बृजेश पटेल ने बताया कि अभिलाषा तिवारी जिन दिनों ग्वालियर जेल में स्मैक बरामदगी के मामले में बंद थीं। उन्हीं दिनों वह भी एक केस में जेल में था। अभिलाषा से इस दौरान उसका परिचय हो गया। उनसे कोई मिलने नही आता था। उनकी हालत पर तरस खाकर उनके खाने-खर्चे के लिए वह रुपया उधार देता रहा। तीन लाख रुपये की यह उधारी अभिलाषा ने जेल से छूटने के कई महीनों बाद भी नही चुकाई। पिछले महीने पहले वह 5 नवंबर को तगादा वसूल करने ग्वालियर से उरई आया लेकिन अभिलाषा ने उसे बैरंग लौटा दिया। इसके बाद जब वह 11 नवंबर को आया तो अभिलाषा ने भड़ुए तेरा पैसा कभी वापस नही मिलेगा कहकर उसे बेइज्जत करके भगा दिया इस टीस के चलते उसने अभिलाषा की हत्या का निश्चय कर लिया। उसने ग्वालियर में अपने मोहल्ले के ही रहने वाले क्राइम की दुनिया के अपने हमबिरादर सोनू यादव के साथ 19 नवंबर को सुबह 6 बजे अभिलाषा के घर आकर पहले सुरेंद्र तिवारी व उनके बेटे डिंपू को स्मैक पिलाकर बेसुध किया। इसके बाद अभिलाषा का गला कटार निकाल कर रेत दिया और बाद में सुरेंद्र तिवारी के सिर पर कुल्हाड़ी मारी जिससे उनका काम तमाम हो गया। बाद में उन्होंने सुरेंद्र तिवारी का पेट भी सब्बल घुसेड़कर फाड़ दिया। इसके बाद आखिर में डिंपू को भी सिर में कुल्हाड़ी मारकर खत्म कर डाला।
वारदात के दौरान उन्होंने अपने रेलवे टिकिट का इस्तेमाल स्मैक पीने के लिए किया था। यही उनके पकड़ने का सुराग साबित हुआ। पुलिस पहले सुरेंद्र तिवारी की बहू और उसके परिजनों को टटोलती रही। इसके बाद उसकी डायरी में लिखे फोन नंबरों से जुड़े लोगों की छानबीन की गई। इसी समय ख्याल आया कि ग्वालियर से उरई तक का घटना के ही दिन का जो रेल टिकिट मिला था उस पर भी गौर किया जाये। इस नाते उसकी डायरी में ग्वालियर के जो नंबर थे उन लोगों पर शिकंजा कसा गया। इन्ही नंबंरों के आधार पर पुलिस बृजेश पटेल और सोनू यादव तक पहुंची। हालांकि पुलिस कई और लोगों को उठाकर लाई थी। जिन्हें दूसरे मामलों में बुक किया गया है।
बृजेश पटेल (45वर्ष) और सोनू यादव उर्फ गोविंद (30वर्ष) का लंबा-चैड़ा आपराधिक इतिहास है। उनके खिलाफ दर्जनों मुकदमें कायम हैं। वारदात के बाद सोनू यादव ग्वालियर जाकर आबकारी के एक मामले में जेल चला गया था। पुलिस उसे रिमांड पर पूंछतांछ के लिए लेने की तैयारी कर रही है। बृजेश ने बताया कि उरई में एक और सोनी उसके निशाने पर है। सोनी के साथ में भी उसका लेनदेन का विवाद है। वारदात करने के दौरान बृजेश पटेल खुद भी सब्बल की चोट खाकर लहूलुहान हो गया था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से तीन लाख चालीस हजार की नगदी भी बरामद हुई है।
पुलिस लाइन में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसपी डाॅ. राकेश सिंह द्वारा वारदात के खुलासे की जानकारी देते समय अपर पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र शाक्य भी मौजूद थे।







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