-भरत दुबे की कलम से

न कोई सुख न सुविधा फिर भी समाज का प्रतिबिम्ब है |

बस लोग कह देते है कि आप लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है |

अपनी समस्या में आवाम सरकारो को हाथ जोड़ पुकारती है |

लेकिन चौथा स्तम्भ दिख जाये तो जनता ताना जैसा मारती है|

कि आप कुछ नही निकालते है हम कितना परेशान है |

वोट लेकर जो गद्दारी कर गए वो पब्लिक के लिए महान है |

कलमकार अपनी जिंदगी गैरो की लड़ाई में गुजारता है |

जब खुद की बिगड़ी हो तो हर शख्स दूर से निहारता है |

ये चौथा स्तम्भ भी वो चिराग है जिसके तले अँधेरा है |

सबके लिए जल रहा है पर खुद का नही कोई सवेरा है |

देश के ये तीन स्तम्भ खुद अपने में मशगूल है

खुद में अपंग चौथा स्तम्भ का दर्जा ये हमारी भूल है |

फ़टे हुए कपड़ो में फकीर की गरीबी खुद में एक पहचान है |

लेकिन शूट बूट के अंदर शर्ट फटी है पत्रकार की इस बात से दुनियां अंजान है |

घर में बेशक कुछ न हो पर जब तक लड़ते रहो दुनियां के लिए तभी तक पहचान है |

जिस दिन पटरी से उतरे तो पत्रकार दुनियां के लिए अंजान है |

फीस नही जमा बच्चों की घर पर बीवी परेशान है|

आंसू पोंछ के घर से निकला पत्रकार तो चेहरे में झूठी मुस्कान है |

परिवार में माँ बीमार है फोन से कह देते है कि आते है |

और दूर कोई गिर जाये सड़क पर तो दौड़े दौड़े जाते है |

खोखली शान की खातिर पत्रकार पूरा जीवन व्यर्थ गंवाता है |

जो गैरो के फर्ज निभाते हुए एक दिन बेमौत ही मिट जाता है |

ये नेता अधिकारी भी नाटकीय ढंग से गैरो की मय्यत में जाते है |

गर भेंट चढ़ गया हो कोई कलमकार तो घर बैठे शोक मनाते है |

इस फकीर बादशाह कलमकार के लिए कोई फण्ड नही रह जाता है |

न कोई पेंशन न कोई पगार इसके हिस्से में कुछ नही आता है |

सुनते आ रहे है इस खोखले जज्बे को जबसे दुनियां आरम्भ है|

कि हट जाओ भाई आप तो लोक तंत्र का चौथा स्तम्भ है |

नेता हो य खिलाड़ी सबका ख्याल देश में रखा जाता है |

स्वास्थ्य पगार और पेंशन की सब कुछ हिस्से में आता है |

बस चौथे स्तम्भ को ही श्राप लगा है हर आरक्षण से नदारद है |

बिना ढाल कपाल के गरीब सतयुग जैसा नारद है |

आत्मघाती बनकर अब और न कुंदे इस खोखले संसार में |

सबको समझा के रखना न बरबाद करे अपना जीवन बेकार में |

भरत दुबे ये कहते है कि अपना दर्द बता सके क्या ऐसा भी कोई प्रतिबिंब है |

कभी भर आती है जो आँखे तो लोग कह देते हैं कि आप तो चौथा स्तम्भ है |
🎤🎤🎤🎤🎤🎤
🙏🏼किसी का ह्रदय दुखा हो तो क्षमा याचना 🙏🏼
😒😒आंतरिक रचना
✍🏽✍🏽भरत दुबे
___9198030390

Leave a comment

Recent posts