उरई। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की जिला इकाई ने ज्वलंत समस्याओं को लेकर बीएसए से उनके आवास पर जाकर भेंट की। महासंघ के शिष्ट मंडल ने बीएसए के रवैये की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल लंबित शिकायतों का तत्परता पूर्वक निस्तारण कर दिया बल्कि यह आश्वस्त भी किया कि उनके कार्यकाल में विभाग का कोई भी अधिकारी व कर्मचारी अनावश्यक रूप से शिक्षकों का आर्थिक शोषण नही कर पायेगा।
प्रतिनिधि मंडल ने बीएसए से कहा कि आपके द्वारा खंड शिक्षाधिकारियों को जो 18 सूत्रीय निर्देश दिये गये थे उनका पालन नही हो रहा है। हालत इतनी बदतर है कि खंड शिक्षाधिकारी तीन दिन ब्लाॅक कार्यालय में बैठने के निर्देश का पालन जरूरी नही समझ रहे और उनकी देखादेखी बिल लिपिक भी मनमाने ढंग से कार्यालय में आने-जाने का रवैया अपनाये हुए हैं। इसके चलते शिक्षकों का न सिर्फ कार्य बाधित होता है बल्कि उन्हें आने-जाने में बेवजह धन की बर्बादी भी झेलनी पड़ती है। बीएसए ने कहा कि वे शिकायत को गंभीरता से संज्ञान में लेगें और स्थिति में सुधार करवायेंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने बीएसए से कहा कि प्राथमिक शिक्षकों की पदोन्नति अवरुद्ध होने से सैकड़ों विद्यालय प्रधानाध्यापक विहीन हैं। शिक्षा की गुणवत्ता में यह स्थिति बाधक बनी हुई है। नगर क्षेत्र के विद्यालयों में तो पिछले 10 वर्षों से पदोन्नति की प्रक्रिया अवरुद्ध बनी हुई है। महासंघ ने यह भी मांग की कि शासन की मंशा के अनुरूप जिला स्तर पर शिक्षकों के स्थानांतरण अविलंब किये जायें। प्रतिनिधि मंडल में महासंघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र राजपूत, संरक्षक प्रकाश नारायण पाठक, जिला प्रभारी अरविंद नगायच, संघर्ष समिति के अध्यक्ष इलियास मंसूरी, जिला महामंत्री प्रदीप चैहान, कार्यवाहक जिला महामंत्री अरुण पांचाल, सुरेश वर्मा, विकाश गुप्ता, बृजेश श्रीवास्तव, विनय मिश्रा, रमाकांत त्रिपाठी, राकेश कुमार, नीतेश शर्मा, जावेद खान, अरविंद स्वर्णकार आदि शिक्षक नेता उपस्थित थे।

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