
उरई। कांग्रेस और सपा के गठबंधन पर सपा के पूर्व सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव द्वारा दिए गए बयान के बाद नेताओं में फिर से हलचल पैदा हो गई है। इस बयान के बाद महीनों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नेताओं में एक उम्मीद जाग गई है। वहीं कांग्रेस नेताओं की भी नींद उड़ गई है। कारण यह है कि जिले की कालपी और माधौगढ़ विधानसभा सीट गठबंधन के बाद कांग्रेस के खाते में चली गई है। मुलायम सिंह के बयान के बाद अगर इन सीटों पर सपा के ही दावेदार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरते हैं तो कांग्रेस को जीत के लाले पड़ सकते हैं और ऐसी स्थिति में कांग्रेस को अपनों से ही चुनौती मिल सकती है। इसका फायदा अन्य राजनीतिक दल न उठा लें इसे लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बिहार की तर्ज पर यूपी में भी विधानसभा चुनाव के ऐन पहले बने गठबंधन को झटका लगने की संभावनाएं जताई जाने लगी हैं। कारण यह है कि जिस तरह बिहार चुनाव के दौरान महागठबंधन की पहल करने वाले तत्कालीन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव आखिरी वक्त में महागठबंधन से पीछे हट गए थे उसी तरह यूपी में भी अब नजर आने लगा है। पहले चरण के मतदान को कुछ ही दिन शेष रह गए हैं और ऐसे में मुलायम सिंह यादव द्वारा दिए गए बयान ने कांग्रेस और सपा के गठबंधन पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुलायम सिंह द्वारा सपा से कांग्रेस के गठबंधन के प्रति जो नाराजगी दिखाई दी है और उन्होंने कांग्रेस के हिस्से में आईं 105 सीटों पर भी अपने समर्थक नेताओं से चुनाव लड़ने का आह्वान कर दिया है उससे पार्टी के बागी नेताओं को हवा मिल गई है। जिले के हालातों पर नजर डालें तो यहां पर तीन में से दो सीटें कांग्रेस के हिस्से में आई हैं। कालपी सीट पर कांग्रेस की सिटिंग विधायक उमाकांति चुनाव लड़ रही हैं तो वहीं माधौगढञ सीट पर कांग्रेस के प्रांतीय नेता विनोद चतुर्वेदी की दावेदारी पक्की मानी जा रही है जबकि इन दोनों ही सीटों पर सपा के नेता कई महीनों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे और अब तक लाखों रुपए भी अपने प्रचार व तैयारियों में खर्च कर चुके थे। माधौगढ़ से सपा नेता लाखन कुशवाहा बीते एक वर्ष से चुनाव की तैयारी में लगे थे और लगभग विधानसभा के प्रत्येक गांव का भ्रमण भी कर चुके थे। कांग्रेस-सपा के गठबंधन के बाद जिले में सबसे ज्यादा झटका उन्हीं को लगा है क्योंकि जिस तरह से लाखन कुशवाहा ने सपा से टिकट मिलने के बाद पूरे जोश-ओ-खरोश से तैयारियां शुरू कर दी थीं और पानी की तरह रुपया बहाना शुरू कर दिया था गठबंधन के बाद उनकी सारी मेहनत व रुपयों पर पानी फिर गया है। वहीं कालपी से भी सपा नेता राकेश पाल, अनूप सिंह समेत कई दावेदार महीनों से तैयारियां कर रहे थे। गठबंधन के बाद यह दावेदार मन मशोस कर घर बैठ गए थे पर अब सपा के पूर्व सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव द्वारा कांग्रेस के हिस्से में आई सीटों पर भी चुनाव लड़ने के बयान के बाद इन दावेदारों को पार्टी का विरोध करने के लिए हवा मिल गई है। संभावना है कि जल्द ही इन सीटों पर सपा के नेता भी चुनाव के लिए नामांकन कर दें अगर ऐसा होता है तो जिले में जीत का सपना संजोए कांग्रेस के प्रत्याशियों को बड़ा झटका लग सकता है और चुनाव में उन्हें अपनों से ही चुनौती मिल सकती है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में कौन-कौन नेता पार्टी के पूर्व सुप्रीमो के बयान की आड़ में पार्टी से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरते हैं।






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