उरई। माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 20 साल बाद रविंद्र सिंह मुन्ना ने चुनाव मैदान में उतरने की हुंकार भरी है। इस बीच उन्होंने किंग मेकर की भूमिका अदा की। लेकिन उनका कहना है कि जिन लोगों को उन्होंने जिताया उन सभी ने उन्हें छला। उन्होंने कहा कि राजनीति में उन्होंने कभी अपने व्यक्तिगत काम कराने की मंशा नही रखी। वे इस भरोसे चुनाव से दूर हो गये थे कि जिन लोगों ने उनसे समर्थन मांगा है उनके द्वारा उनके लगनशील समर्थकों को प्रोत्साहन दिया जायेगा और क्षेत्र का विकास कराया जायेगा। लेकिन जीतने के बाद दूसरे सभी लोगों की फितरत मतलब निकलते ही उन्हें दूध की मक्खी की तरह फेंक देने की रही जिसका उन्हें बेहद मलाल है।
रविंद्र सिंह मुन्ना ने 1989, 1993 और 2002 में तीन चुनाव लड़े। इस दौरान उन्होंने पार्टी के नाम पर ऐसे जहाज में सवारी की जो डूब रहा था। लेकिन कामयाबी न मिलने के बावजूद व्यक्तिगत दम पर उन्होनें जितने वोट जुटाये वे उन्हें माधौगढ़ क्षेत्र का सबसे बड़ा मास लीडर साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
1989 में माधौगढ़ क्षेत्र से जनता दल की उम्मीदवारी घटकवाद में उलझ जाने की वजह से रविंद्र सिंह मुन्ना का एक तरह से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मुकाबला करना पड़ा। इस दौरान 10907 वोट लेकर उन्होंने चुनाव न जीत पाने के बावजूद व्यक्तिगत लोकप्रियता का डंका गुंजा दिया। इस नाते होना तो यह चाहिए था कि जनता दल 1991 में उन पर दांव लगाता लेकिन पार्टी ने दूसरे उम्मीदवार को टिकट दे दिया जो उन्हें मिले मतों में से आधे में सिमट गया।
1993 में जब सपा-बसपा गठबंधन की आंधी चल रही थी रविंद्र सिंह मुन्ना ने माधौगढ़ क्षेत्र में एक बार फिर अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता की परीक्षा दी। मुस्लिम और ओबीसी का लगभग सारा वोट इस चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन की ओर मुखातिब हो गया था फिर भी रविंद्र मुन्ना ने 20884 वोट अपनी दम पर जुटाकर राजनैतिक प्रेक्षकों को चैका दिया।
1996 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाने की वजह से उन्होंने चुनाव नही लड़ा क्योंकि इस वर्ष भाजपा ने संतराम सिंह को उम्मीदवार बना दिया था। इस दौरान उनसे वायदा किया गया था कि अगला चुनाव लड़ने का मौका उनको ही दिया जायेगा। लेकिन पार्टी ने यह वायदा निभाया नही इसलिए 2002 में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ले ली। इस चुनाव में कांग्रेस की हालत बेहद पतली थी इसके बावजूद उनकों 20418 मत मिले। अब जबकि वे महान दल से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं पचनद में काफी पानी बह चुका है लेकिन इसके बावजूद उनके समर्थकों को काफी भरोसा है कि रविंद्र सिंह मुन्ना इस चुनाव में कोई नया गुल खिलाने में कामयाब होंगे।






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