कोंच-उरई । विकास के मामले में पिछड़ा बुंदेलखंड नारी शक्ति को सम्मान देने के मामले में दकियानूसी विचारधारा का हमेशा से हामी रहा है और घरेलू हिंसा से लेकर सामाजिक हिंसा की शिकार यहां की महिलाओं की स्थिति अभी भी बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। यहां की महिलाओं का जीवन चौके-चूल्हे से शुरू होकर वहीं खत्म हो जाता है। सियासी रूप से भी यहां की महिलाओं को केवल प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करने का पुराना चलन है और पुरुषों का अभी भी वर्चस्व बना हुआ है। महिलाओं को उत्पीडऩ से बचाने के लिये बुंदेलखंड की एक हिम्मतवर महिला संपत पाल ने गुलाबी गैंग खड़ा कर महिलाओं को एकजुट करना शुरू किया और उन्हें न सिर्फ आत्मरक्षा के गुर सिखा कर शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत करने बल्कि अन्य महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचारों का प्रतिकार लेने में भी उनकी भूमिका निश्चित कर उन्हें व्यवस्था के खिलाफ लडऩे में माहिर किया। उन्हीं की राह पर निकली एक और जांबाज देहाती महिला अंजू शर्मा ने भी गुलाबी गिरोह की नींव डाली जो महिला हितों के लिये संघर्ष कर रहा है। इस तरह सियासी रूप से न सही, व्यक्तिगत तौर पर महिलाओं को सशक्त बनाने की मुहिम जरूर तेज हुई है।







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