उरई। सौतेले भाई की हत्यारे को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उसके साथी के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में लाश को गायब करने के जुर्म में भी दोनों को सात-सात वर्ष कठोर कारावास की सजा अलग से दी गई है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक मृतक जंगी (40वर्ष) कोटरा थाने के सिकरी व्यास गांव का रहने वाला था। उसके सौतेले भाई रमेश उर्फ मायका ने एक दिन उसकी पत्नी के साथ कुचेष्टा की जिसकी शिकायत करने पर जंगी ने उसे जमकर पीटा।
इसे लेकर रमेश कई जगह जंगी को मार डालने का अल्टीमेटम सुना चुका था। रमेश के खतरनाक इरादे जानकारी में आने पर जंगी अपनी पत्नी को लेकर शहर आ गया और उमरारखेरा मोहल्ले में रहने लगा। इसी दौरान मई-2013 में जंगी जब अपनी ससुराल मटौंध जिला बांदा गया हुआ था एक दिन अचानक गायब हो गया। उसकी तलाश की जा रही थी कि एक दिन रमेश ने अपनी भाभी को फोन करके कहा कि उसने जंगी को सिकरी व्यास में ले जाकर मार डाला है और उसका शव जंगल में फेंक आया है। इससे जंगी की पत्नी स्तब्ध रह गई और उसने अपने ससुर रामभरोसे को इसकी जानकारी दी। रामभरोसे ने पुलिस को घटना के बारे में बताया तो जंगी के शव की तलाश की गई। काफी मशक्कत के बाद उसका कंकाल सिकरी व्यास के जंगल में बरामद कर लिया गया। घटना स्थल पर मिले कपड़ों से रामभरोसे ने अपने पुत्र की पहचान कर ली।
बाद में पुलिस ने कंकाल के डीएनए का रामभरोसे के डीएनए से मिलान कराया जिससे शव जंगी का ही होने की बात पुख्ता हो गई। रामभरोसे की रिपोर्ट पर पुलिस ने रमेश को गिरफ्तार कर लिया। पूंछतांछ के दौरान रमेश ने हत्या करने में अपने एक और साथी नरेंद्र उर्फ कल्लू निवासी मौदहा, हमीरपुर को भी शामिल बताया। नतीजतन नरेंद्र को भी पुलिस ने जल्द ही गिरफ्तार कर लिया।
इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नरेंद्र कुमार तृतीय की अदालत में मुकदमा चला। शासकीय अधिवक्ता मोती लाल पाल ने अभियोजन की ओर से पैरवी की। मजबूत पारिस्थितिक साक्ष्यों के आधार पर मंगलवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोनों ही अभियुक्तों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड व लाश गायब करने के मामले में सात-सात वर्ष की कठोर सजा के साथ पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाने का एलान किया।







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