उरई। होली के साथ कई मिथकीय गाथायें जुड़ी हुईं हैं जो इस अनूठे त्यौहार की रोचकता और रोमांचकता को बढ़ाती हैं। इसमें सबसे मुख्य कथा है होलिका दहन की। जब भी होलिका दहन का दिन नजदीक आता है इस कथा के चलते बुंदेलखंड का एक हिस्सा रहस्य-रोमांच से भरे आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
हालिका दहन की गाथा के केंद्र में है जिले के कोटरा थाना अंतर्गत आने वाले सलाघाट के उस पर झांसी जिले का डिकौली गांव। सलाघाट पर अथाह जलराशि का सौंदर्य निहारने के लिए पहुंचने वाले पर्यटकों को इस पार से ही वह डीकांचल पर्वत दिखाई देने लगता है जिसके नीचे डिकौली गांव बसा है। कहा जाता है कि ऐरच के असुर शासक हिरणाकश्यप ने इसी डीकांचल पर्वत की चोटी पर रासरमण के लिए विलास गृह बनवा रखा था। डीकांचल की चोटी पर पुराना दालान दूर से ही दिख जाता है। लोग इसी दालान को हिरणाकश्यप के विलास गृह का अवशेष बताते हैं।
डीकांचल पर्वत के नीचे बेतवा में बहुत गहरा जलकुंड है। कुछ वर्ष पहले बैराज के लिए सर्वे करने आये माताटीला बांध के इंजीनियरों ने इसकी गहराई 30 मीटर से अधिक नापी थी। इस कुंड के बारे में किवदंती है कि हिरणाकश्यप ने प्रहलाद से नाराज होने पर डीकांचल पर्वत से इसी कुंड में उसे डुबोने के लिए फेका था लेकिन प्रहलाद का अलौकिक कृपा के कारण बाल-बांका नही हो सका था। प्रहलाद की याद में लोगों ने इसका नामकरण प्रहलाद कुंड कर दिया है।
डिकौली में ही प्रहलाद की बुआ होलिका स्वयं अग्निरोधी दुशाला ओढ़ कर आई थी तांकि जब वह प्रहलाद को लेकर जलती आग में बैठे तो उसे कोई नुकसान न हो लेकिन ऐन मौके पर हवा के झोकें से दुशाला उसके शरीर से हटकर प्रहलाद के शरीर में लिपट गया जिससे प्रहलाद तो नही जले लेकिन होलिका की ही जलकर मौत हो गई। इस किवदंती में कितनी सच्चाई है इसका कोई साक्षी नही है लेकिन यह कथा पीढ़ी दर पीढ़ी पूरे विश्वास के साथ दोहराई गई है और आज भी यह क्रम जारी है। इस कारण प्रदेश और देश के किसी भी कोने में लोगों को वह जगह देखने की बहुत उत्सुकता हो सकती है जहां होलिका दहन का घटनाक्रम हुआ बताया जाता है। इस लिहाज से देखें तो सलाघाट से नौका बिहार कराते हुए लोगों को डिकौली ले जाकर वहां प्रहलाद से जुड़े स्पाॅट दिखाये जायें तो बुंदेलखंड का यह इलाका पर्यटकों का गढ़ बन सकता है जिससे कई लोग यहां रोजगार हासिल कर सकते हैं। लेकिन ऐसा संभव नही हो पाया। होली आती है तो बुंदेलखंड के भाग्यविधाताओं में विजन की कमी का सबसे बड़ा नमूना बनी यह विसंगति निश्चित रूप से सयाने लोगों को सालती होगी।

Leave a comment