
उरई ।जिस इंसान ने बसपा का बुन्देलखण्ड से वजूद मिटाने का प्रयास किया। आखिर सुप्रीमो मायावती उस पर इतना क्यों भरोसा कर रही हैं। यह हम सब की आंखों के सामने से चला जाये। नहीं तो अच्छा नहीं होगा। कुछ ऐसे ही सख्त तेवर आज बुन्देलखण्ड के जनपद जालौन के उरई में बसपा की समीक्षा बैठक के दौरान बसपा नेता नौशाद अली के खिलाफ मिशनरी कार्यकर्ताओं ने दिखाये। जिसे देख नौशाद अली किसी प्रकार पीछे के रास्ते से मंच छोड़कर भाग गये।
जनपद जालौन के उरई में स्थित एक स्थानीय होटल में बसपा की समीक्षा बैठक हुई। जिसमें राज्य सभा सांसद डॉ. अशोक सिद्धार्थ, पूर्व मंत्री इंद्रजीत सरोज, आर.एस कुशवाहा, लालाराम अहिरवार और नौशाद अली मौजूद रहे। सभी एक ही मंच पर बैठे हुए थे। समीक्षा बैठक में मिशनरी कार्यकर्ताओं ने भी बढ़-चढ कर भाग लिया। लेकिन बैठक शुरु होने से पहले ही मंच पर बसपा नेता नौशाद अली को देखा तो सभी कार्यकर्ता आग बबूला हो उठे और उन्होंने नारे बाजी करते हुये नौशाद अली वापस जाओं बुन्देलखण्ड बचाओं जैसे नारे लगाकर विरोध शुरु कर दिया।
मिशनरी कार्यकर्ताओं ने बसपा सुप्रीमो मायावती से नौशाद अली को पार्टी से बाहर निकालने की मांग करते हुये जमकर हंगामा किया। और आरोप लगाया कि उक्त नेता भाजपा से मिलकर मुस्लिम और पार्टी के बेस वोटर के बीच झगड़ा कराना चाहता है। आक्रोशित कार्यकर्ताओं को काफी समझाने का प्रयास किया। लेकिन उन्हें शांत नहीं किया जा सका। कार्यकर्ताओं का आक्रोश बढ़ते देख नौशाद अली को किसी प्रकार पीछे के रास्ते से बैठक से बाहर निकाला गया। यह देखने के बाद आखिर में आक्रोशित कार्यकर्ताओं का क्रोध भले ही शांत हुआ। लेकिन उनकी मांग नौशाद अली को बाहर निकालो बसपा को बचाओ की रही।






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