उरई। पति की मौत के बाद परिवार के लोगों के उत्पीड़न और नोच-खसोट से तंग महिला जब दूसरे गांव में जाकर रहने लगी तो भी वे उसका पीछा छोड़ने को तैयार नही हुए। उधर पीड़ितों की मदद के लिए बनाई गई पुलिस महिला का संरक्षण करने की बजाय उसकी खेती और मकान बिकवाने के लिए उसके परिवार वालों के साथ हो गई है। भले ही उसकी करतूत से सब कुछ छिनने के बाद बेसहारा महिला मोहताज होकर प्राण तक गवां देने की हालत में पहुंच जाये। जो लोग योगी सरकार आने से खाकी के तौर तरीकों में बदलाव की उम्मीद कर रहे थे उन्हें यूपी के जालौन जिले के कुठौंद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मकटौरा में पति के मरने के बाद उनके परिवार के लोगों के उत्पीड़न से बचने के लिए रह रही महिला का हाल जानकर निराशा होगी। पुलिस की हृदय हीनता की कहानी पीड़ित महिला सियाकांती पत्नी स्व. मोतीलाल ने जब जिला मुख्यालय पर आकर अपर पुलिस अधीक्षक को सुनाई तो वे भी द्रवित हुए बिना नही रह सके। महिला ने बताया कि उसके जेठ के लड़कों विनोद कुमार, शशि, भूरे, गांधी, साधू और अवध किशोर ने दबाव बनाकर उसकी दो बीघा जमीन बिकवा दी। तो वह अपने मूल स्थान कुठौंद को छोड़कर रिश्तेदारी में मकटौरा आकर रहने लगी तांकि उसकी शेष जमीन और मकान बचा रह सके। लेकिन जेठ के लड़के फिर भी बाज नही आ रहे। वे मकटौरा आकर जमीन मकान न बेचने पर जान से मारने की धमकी देते हैं और बहादुरपुर चैकी की पुलिस उनका सहयोग करती है। गजब की बात यह रही कि महिला का रोना सुनकर जब एडीशनल एसपी ने मोबाइल पर चैकी इंचार्ज को खरी-खोटी सुनाईं तो डरने की बजाय उसने महिला का साथ देने वाले एक ग्रामीण का 107/16 में चालान कर दिया तांकि महिला को यह संदेश दिया जा सके कि चैकी पुलिस के कोप से उसे विभाग के अधिकारी भी नही बचा पायेंगे इसलिए अपनी खैर चाहों तो चैकी पुलिस की मंशा के मुताबिक खेती और मकान का बैनामा वहां कर दो जहां पर जेठ के लड़के चाहते हैं। क्या योगी राज में पुलिस की निरंकुशता का नया कीर्तिमान स्थापित किया जा रहा है।

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