उरई। योगी सरकार में किसी भी विभाग की ओर नजरें घुमाई जाये, सर्वत्र अंधे पीसे कुत्ता खाये की हालत दिखाई देती है। बेसिक शिक्षा विभाग में एक शिक्षक की जिस तरह तूती बोल रही है उसे इसकी एक ज्वलंत नजीर के रूप में देखा जा सकता है। रामपुरा ब्लाक के टीहर गांव में कन्या जूनियर हाईस्कूल में तैनात शिक्षक मंगल सिंह एनपीआरसी भी है। अपनी पाॅजीशन का फायदा उठाकर उन्होंने अपनी शादीशुदा पुत्री की नियुक्ति प्रेरक के रूप में करा ली जो स्थाई तौर पर अपनी ससुराल में रहती है, न तो उसने कभी किसी प्रशिक्षण में भाग लिया है और न ही कही पढ़ाने जाती है। मीटिंगों तक में उसके दर्शन नहीं होते। फिर भी उसका दो हजार रूपये का मानदेय बदस्तूर निकल रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी जानकारी होने के बावजूद अनभिज्ञता का नाटक करके इस धांधली को पोसने में लगे है। मंगल सिंह के किस्से यही खत्म नहीं हो जाते। एक शिक्षक होकर वे पूरे प्रशासन पर किस तरह भारी पड़ रहे है इसकी दूसरी नजीर है उनकी पत्नी विद्या देवी की आंगनवाड़ी में कार्यकत्री के रूप में तैनाती। विद्या देवी भी कभी आंगनवाड़ी केन्द्र नहीं खोलती और नौनिहालों को भेजा जाने वाला पुष्टाहार चोर बाजार में खपा देती है। कार्यक्रम विभाग के अधिकारी आंगनवाड़ी केन्द्रों की चैकसी के नाम पर लाखों का टीए, डीए बर्बाद कर रहे है लेकिन यह चैकसी कैसे हो रही है। विद्या देवी के केन्द्र की हालत इसका जीता जागता सबूत है। बहरहाल विभागीय अधिकारियों की रतौधी देख ग्रामीण मंगल सिंह की दादागीरी के खिलाफ आवाज उठाने पर आ गये है। गुलाब सिंह, मुकेश सिंह, सुरेन्द्र सिंह, मोहन, सतेन्द्र सिंह, कल्लू सिंह और मोहर सिंह आदि ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित ज्ञापन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को भेजा है। क्या बहरा और अंधा शासन और प्रशासन इस ज्ञापन पर गौर कर कोई कार्रवाई करने की सोचेगा।







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