उरई। शासन के दूसरे विभागों की तो बात छोड़िये अनुशासित कहें जाने वाले पुलिस महकमे में भी स्थानान्तरण सम्बन्धी दिशा निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। डीजीपी ने आदेश जारी किये थे कि एक ही स्थान पर तीन साल से अधिक समय से जमे सभी पुलिस कर्मी हटा दिये जाये लेकिन बिना राजा की फौज की तरह प्रदेश में चल रहे काम काज का नतीजा है कि जिले में निर्धारित समय से अधिक का कार्यकाल पूरा हो जाने के बावजूद दुधारू पुलिस कर्मियों को हटाने की जुर्रत जनपद के अफसर नहीं कर पा रहे है। गोहन थाने में तैनात सिपाही अजय कुमार नायक इसका उदाहरण है। इस सिपाही को थाने में तैनात हुये साढ़े तीन वर्ष हो चुके है। अंदाजा यह था कि नई स्थानान्तरण नीति का बुल्डोजर चलने से इसे अबकी बार अपना पसंदीदा थाना छोड़ना ही पड़ेगा। हाल में गाइड लाइन के घेरे में आने वाले 154 सिपाहियों को इधर से उधर करने की गश्ती जब जारी हुयी तो अजय कुमार नायक का नाम भी आ गया। उन्हें गोहन से कालपी स्थानान्तरित करने का आदेश तो जारी हुआ लेकिन अधिकारी उस पर अमल नहीं कर सके। कहा जाता है कि अजय कुमार नायक ही मोरंग लदे ओबर लोड बाहन पार कराने की सेंटिग एसओ से कराता है। इसमें लिप्त दबंगों का सिक्का जिले के पुलिस अधिकारियों पर भी चलता है। यही कारण है कि मोरंग के खेल के खिलाड़ियों ने बीटो कर दिया तो अधिकारियों को बैकफूट पर जाकर सिपाही का तबादला स्थगित करना पड़ा।

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