उरई। नशीले पदार्थों का 10 साल पहले मृत घोषित हो चुका कुख्यात तस्कर दूसरे शहर में ठिकाना बनाकर अपना कारोबार जारी रखे हुए था। उसके गिरोह में आपस में ही मनमुटाव हो जाने के कारण यह खबर पुलिस के पास तक आ गई। जिसके बाद व्यूह रचना करके उसे दबोच लिया गया। पुलिस ने स्वीकार किया कि दाखिल दफ्तर हो चुके उसके मुकदमों को पुनर्जीवित करने के लिए काफी कानूनी पापड़ बेलने पडे़गे। जालौन कस्बे के मोहल्ला दलालनपुरवा का रहने वाला मुकेश कुमार उर्फ चिकना नशीले पदार्थों और असलहों की तस्करी से पुलिस की नांक में दम किये हुए था। एक दर्जन मुकदमे कायम होने और कई बार पकड़े जाने के बावजूद वह बाज नही आ रहा था। इस बीच पुलिस को चकमा देने के लिए उसने अपने आपको मरा घोषित करा लिया और उसकी मां ने उसके मृत्यु का प्रमाण पत्र नगर पालिका से हासिल कर उन मुकदमों में अदालत में दाखिल कर दिया। जो उस पर चल रहे थे। इसलिए उसके सारे मुकदमे दाखिल दफ्तर हो गये। उधर चिकना ने भूमिगत होकर ग्वालियर में अपना ठिकाना बना लिया। जहां से वह जालौन कस्बे में अपने एजेण्टों को नारकोटिक्स का असाइनमेण्ट बराबर भेजता रहा। पुलिस को कई बार उसके जिन्दा होने की उड़ती उड़ती खबरें भी तब मिली जब किसी कोतवाल ने नशीले पदार्थ न बिकने देने की ठानी और फिर भी यह कारोबार काबू में नहीं आ पाया। लेकिन पुलिस ने चंडूखाने की चर्चा मानकर इन खबरों को पहले हमेशा नजर अंदाज किया। पर इस बार उसके गिरोह के विभीषण इतने पक्के सबूतों के साथ जालौन कोतवाली के मौजूदा प्रभारी निरीक्षक महाराजसिंह तोमर के पास आये कि बरबस ही उनको यकीन करना पड़ा हालांकि चिकना की इतनी फुलप्रूफ साजिश ने पहले तो उन्हें दंग करके रख दिया। आखिरकार सटीक मुखबरी के आधार पर महाराज सिंह ने ग्वालियर पहंुचकर उसे उसके घर से दबोच लिया। यह दूसरी बात है कि तकनीकी कारणों से उसकी गिरफ्तारी जालौन में ही कोंच चौराहे से 190 ग्राम डाइजापाम पाउडर के साथ दिखाई गयी है। प्रभारी निरीक्षक महाराज सिंह ने इस पेचीदा मामले में उसका फर्जी मृत्यू प्रमाण पत्र तैयार कराने में सहयोग देने वाले नगर पालिका कर्मचारियों और इस प्रमाण पत्र के हवाले से अदालत को गुमराह करने वाली उसकी मां के खिलाफ भी मुकदमा बनाये जाने की संभावना से इंकार नहीं किया।






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