उरई। मंगलवार की रात कुठौंद में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अधिकारी की बेल्टों से पिटाई के लिए आरोपित दरोगा और उसके दो साथी सिपाही भारी दबाब के बाद एसपी को निलम्बित करने पड़े। हालांकि इस घटना में शामिल एक सिपाही पर उनकी मेहरबानी बरकरार है।  मंगलवार को कुठौंद में संघ के अधिकारी पंकज शुक्ला को शराब के नशे में दरोगा जितेन्द्र सिंह ने बेल्टो से पीटते हुए सीखचों के अन्दर कर दिया था। अगर कोई और सरकार होती और उसके पितृ संगठन से जुड़े व्यक्ति के साथ पुलिस ने ऐसी ज्यादती कर दी होती तो भूचाल आ जाता। दरोगा तो निपटता ही साथ ही अधिकारी भी लपेट में आ जाते। वजह यह है कि सत्तारूढ़ पार्टी जिस संगठन से प्रेरणा लेती है उसके स्वयं सेवकों के साथ कितने अदब कायदे से पेश आया जाना चाहिए अगर अधिकारियों में मातहतों को यह पाठ पढ़ाने की क्षमता नहीं है तो बड़ी जिम्मेदारी के पदों पर उनको बैठाया जाना प्रश्न चिन्ह बन जाता है। जितेन्द्र सिंह की शराब पीकर बवाल करने की शोहरत से परिचित होने के वावजूद उन्हें चौकी प्रभारी का पद सौंपा जाना अपने आपमें एक बहुत बड़ी विडम्बना था।  इसके वावजूद अधिकारियों ने संघ पदाधिकारी के उत्पीड़न को पहले तो कोई भाव ही नहीं दिया। सुबह के अखवार इस दुस्साहसिक घटना से रंगे हुए थे लेकिन किसी अधिकारी ने कोई संज्ञान नहीं लिया। जब सांसद भानूप्रताप वर्मा और जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल स्वयं एसपी से मिले तब कहीं दरोगा और सिपाहियों को लाइन हाजिर करने की हल्की फुल्की कार्यवाही की गई। इसके बाद जब चर्चा हुई अगर शासन सपा का होता तो भी क्या अधिकारी इतने ढ़ीले रह पाते। तब कहीं भाजपा के बड़े नेताओं का बल जागा और उन्होंने एक बार फिर एसपी से बात की। इसके बाद एसपी ने जालौन सीओ संजय शर्मा की प्रारम्भिक रिपोर्ट के आधार पर दरोगा जितेन्द्र सिंह और दो सिपाहियों को निलम्बित कर दिया है लेकिन सिपाही अरूण कुमार के खिलाफ कार्यवाही नहीं की है। जो जन चर्चा के मुताबिक पंकज शुक्ला के लिए बेल्ट लाया था और जिसने उन पर बेल्ट से सोड़ने की शुरूआत की थी। बहरहाल संघ के अधिकारी की थाने के अन्दर पुलिस द्वारा वेरहम पिटाई के इस किस्से से सारे प्रदेश में योगी सरकार की बुरी किरकिरी हुई है।

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