उरई| रेलवे स्टेशन के कैंटीन संचालक मानक, नियम व कायदों की उड़ा रहे धज्जिया, खाने की बस्तुओं में गुणवत्ता व बजन में भी बड़ी अनदेखी, एमआरपी से अधिक कीमत पर सामान बेचकर यात्रियों को लूटा जा रहा है।

बावजूद स्टेशन प्रबंधक और उच्च अधिकारियों के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्टेशन कैंटीन में वेंडरों की मनमानी सामने आने पर देखना ये होगा रेलवे प्रबन्धन किस प्रकार से करवाई करता है।

स्टेशन पर शर्मा रसगुल्ला केंटीन संचालित हो रहा है। यहां पर बोतल बंद पानी 15 रुपए की जगह 20-25 रुपए और 36 का कोल्ड ड्रिंक 40-45 में बेच रहे है। यही स्थिति चिप्स, बिस्किट समेत अन्य खाद्य सामग्रियों की है।

ट्रेनों की वेंडरो द्वारा बेचा जा रहा घटिया खाने का सामान और प्रतिबंधित पानी

स्टेशन केंटीन के वेंडरो की मनमानी का अड्डा बन गया हैं। यात्रियों को बीमार कर देने वाला घटिया खाने का सामान बेचा जा रहा है। प्रतिबंधित पानी की बिक्री कर यात्रियों से जमकर वसूली की जा रही है। यही नहीं खान-पान के सभी सामग्रियों के निर्धारित रेट से ज्यादा वसूला जा रहा है। यात्री इस कदर परेशान हो चुके हैं कि वे इनकी मजबूरी झेलने को मजबूर हैं।

अनदेखी की हद तो तब हो जाती है जब

एक्सपायरी डेट वाले सामान तक की बिक्री मुनाफा कमाने के कारण कर दी जाती है।

रेल परिसर में प्रतिंबंधित पानी के बोतल भी ठेकेदारों की मिलीभगत से बेची जा रही है।

मांगते रहे, लेकिन नहीं दिया रेल नीर

इरफान नाम के एक रेल यात्री ने बताया कि उसने शर्मा केंटीन पर बोतलबंद पानी मांगा तो रेलनीर के बदले दूसरे नाम का बोतलबंद पानी थमा दिया। जिसकी कीमत 15 रुपये थी उनसे उसकी कीमत 20 रुपये बसूल की गई।

कुछ हजार रुपए जुर्माना देकर बच निकलते हैं

रेलवे में प्रतिबंधित पानी और घटिया खाने के सामान बेचने का खेल जारी है।अधिकारियों के छापेमारी के बावजूद यह धंधा खूब फल-फूल रहा है। जानकारी के अनुसार इस घंधे में मुनाफा लाखों रुपए का है जबकि पकड़े जाने पर मात्र कुछ हजार रुपए जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है। मुनाफा और जुर्माना के बीच का अंतर इतना ज्यादा है कि तकरीबन हर ट्रेन में केंटीन संचालक अपने वेंडरो द्वारा प्रतिबंधित पानी और घटिया सामग्री बेच कर भारी मुनाफा बटोर रहे हैं।

वेंडर वनाने में नियमो की उड़ा रहे केंटीन संचालक धज्जिया

नियम के अनुसार ट्रेनों ने सामन बेचने बाले वेंडरो का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, उनका हर तीन माह में मेडिकल होना चाहिये, सभी वेंडर साफ सुथरी ड्रेस, व खुद भी साफ होने चाहिये, सर पर हेयर मास होना चाहिये, इन सब मानको को ताक पर रखकर केंटीन संचालक वेंडर रख यात्रियों के स्वास्थ्य व जान माल के साथ बड़ा खिलवाड़ कर रहे है। देखना यह है कि रेलवे इतना सब होने के बाबजूद केंटीन संचालक पर क्या कार्यवाई करते है।

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