
कोंच-उरई । ऐतिहासक रामलीला का गंगा पार मेला सागर तालाब पर प्रथम मैदानी पायदान पर संपन्न हुआ। मेला देखने के लिये सागर तालाब के चारों ओर बनी सीढ़ियों पर महिलाओं व पुरुषों की भारी भीड़ देर शाम तक जुटी रही। पहली बार वनवासी वेश में नगर भ्रमण पर निकली राम लक्ष्मण व जानकी की सवारी का घर-घर स्वागत किया गया, आरती उतारी गई।
गंगापार के बाद रामगंज बाजार में राम, लक्ष्मण और जनक नंदिनी सीता जी तथा आगन्तुकों का दुकानदारों ने सौंफ. सुपाड़ी. लौंग इलायची खिलाकर भव्य स्वागत किया।
ऐतिहासिक चंदेलकालीन सागर तालाब में आज रामलीला की पहली मेला प्रस्तुति गंगापार संपन्न हुई। वनवास मिलने के बाद अयोध्या से निकले राम, लक्ष्मण और सीता गंगा तट पर पहुंचते हैं ,सागर तालाब के पूर्वी छोर पर गंगा पार उतारने के लिये राम केवट को बुलाते हैं तो केवट पहले उनके पांव पखारने के लिये कहता है। तत्पश्चात गंगा पार लगाने की शर्त रखता है। इस पर भगवान श्री राम जानकी जी की तरफ देखकर केवट को पैर पखारने के लिये कहते हैं। तब केवट पांव पखार कर उन्हें अपनी नाव से गंगा पार कराता है। केवट की भूमिका गौड़वंशीय परिवार के सदस्य नमन चतुर्वेदी ने निभाई । नाव खेने में ढीमर बिरादरी के राजेन्द्र चौधरी, घनश्याम, लल्लू रायकवार आदि लगे थे। इस दौरान धर्मादा रक्षिणी सभा के अध्यक्ष गंगाचरण वाजपेयी, मंत्री मिथलेश गुप्ता, रामलीला समिति के अध्यक्ष रामकुमार अग्रवाल, मंत्री केशव बबेले, पूर्व बारसंघ अध्यक्ष विज्ञान विशारद सीरौठिया, ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष देवीदयाल रावत, पूर्व बारसंघ अध्यक्ष ओमशंकर अग्रवाल, प्रतीक मिश्रा, लालजी कुशवाहा, नवनीत गुप्ता, जय मुखिया , अतुल चतुर्वेदी. रवि दुबे ,आकाश राठौर आदि मौजूद रहे। पुलिस की सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे।






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